भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। एक समय दुनिया के बड़े देशों से हथियार आयात करने वाला भारत अब रक्षा निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। हाल के वर्षों में स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की बढ़ती मांग ने भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना दिया है। इसी कड़ी में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सबसे ज्यादा चर्चा में है।
रक्षा निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड
रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 62 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल का असर अब रक्षा उत्पादन और निर्यात दोनों क्षेत्रों में साफ दिखाई दे रहा है।
ब्रह्मोस बनी वैश्विक आकर्षण का केंद्र
हाल के सैन्य अभियानों में अपनी क्षमता साबित करने के बाद ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर अंतरराष्ट्रीय रुचि तेजी से बढ़ी है। कई देशों ने भारत के साथ इस अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली को खरीदने को लेकर बातचीत शुरू की है। फिलीपींस के साथ पहले ही बड़ा समझौता हो चुका है, जबकि वियतनाम और इंडोनेशिया भी इसे अपने रक्षा बेड़े में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका की भी नजर
रिपोर्टों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान, मिस्र, थाईलैंड, मलेशिया, ब्राजील और चिली जैसे देशों ने भी ब्रह्मोस में रुचि दिखाई है। कई देशों के लिए यह मिसाइल उनकी समुद्री और हवाई सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है। भारत के लिए यह रक्षा निर्यात बढ़ाने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
क्यों खास है ब्रह्मोस मिसाइल?
भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। यह लगभग 3 मैक की गति से उड़ान भर सकती है और दुश्मन के रडार तथा एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता रखती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी समेत कई प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। यही बहु-आयामी क्षमता इसे दुनिया की सबसे भरोसेमंद और प्रभावी मिसाइल प्रणालियों में शामिल करती है।