Embroiled in controversy: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। भगवान राम को लेकर दिए गए उनके ताजा बयान ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, नेताओं के बयान राजनीतिक तापमान बढ़ा रहे हैं। मदन मित्रा अपनी मिलनसार छवि और जमीन से जुड़े नेता के तौर पर पहचाने जाते हैं, लेकिन उनके कई बयान समय-समय पर विवाद का कारण बने हैं। भाजपा ने उनके बयान को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है, जबकि पार्टी को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है।
राजनीतिक सफर और उतार-चढ़ाव
दक्षिण कोलकाता से ताल्लुक रखने वाले मदन मित्रा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। 1970 के दशक में वे पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी के करीबी सहयोगी रहे और छात्र राजनीति के जरिए अपनी पहचान बनाई। बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया और पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे। 2011 में कमरहाटी सीट से पहली बार विधायक चुने गए और ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री भी बने। हालांकि शारदा चिटफंड मामले में नाम आने के बाद उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। 2016 और 2019 में हार के बाद 2021 में उन्होंने फिर से विधानसभा में वापसी की।
बयानों और मामलों से जुड़ा विवाद
मदन मित्रा का नाम कई विवादों से जुड़ा रहा है। गैंगरेप जैसी गंभीर घटनाओं पर उनकी टिप्पणियों की कड़ी आलोचना हुई और पार्टी को सफाई देनी पड़ी। इसके अलावा उन्होंने एक बार अपनी ही पार्टी में कथित भ्रष्टाचार को लेकर बयान देकर सियासी भूचाल ला दिया था, जिसके बाद उन्हें माफी मांगनी पड़ी। शारदा चिटफंड और नारदा स्टिंग ऑपरेशन जैसे मामलों में गिरफ्तारी भी हो चुकी है, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। राजनीति के साथ-साथ उन्होंने फिल्मी दुनिया में भी कदम रखा, लेकिन विवादों ने हमेशा उनके सियासी करियर को घेरे रखा है।