प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत के साथ ही सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर सरकार पूरी तरह अलर्ट दिखी। Yogi Adityanath खुद पल-पल की मॉनिटरिंग करते नजर आए। अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सरकार इस मेले को मिनी कुंभ के रूप में देख रही है, इसलिए किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। संगम क्षेत्र में तंबुओं की नगरी बस चुकी है और हर व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
पहले ही दिन उमड़ा आस्था का सैलाब
माघ मेले के पहले दिन पौष पूर्णिमा पर करीब नौ लाख श्रद्धालुओं ने संगम में पवित्र स्नान किया। स्नान के बाद श्रद्धालु अक्षयवट और लेटे हनुमान मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचे। प्रशासन के अनुसार 44 से 45 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। करीब 20 लाख कल्पवासी पूरे मेले के दौरान गंगा तट पर रहकर साधना करेंगे। मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में बांटा गया है और आठ किलोमीटर लंबे स्नान घाट तैयार किए गए हैं।
फर्जी बाबाओं की गिरफ्तारी से अलर्ट
मेले के पहले ही दिन सुरक्षा एजेंसियों ने दो फर्जी बाबाओं को गिरफ्तार किया, जिनके पास से फर्जी आधार कार्ड और नकली नोट बरामद हुए। यह सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पूरे मेला क्षेत्र में निगरानी और बढ़ा दी गई। AI तकनीक से लैस CCTV कैमरे, ATS और अन्य विशेष सुरक्षा दलों को सक्रिय कर दिया गया। मुख्यमंत्री का साफ संदेश है कि किसी श्रद्धालु को खरोंच तक नहीं आनी चाहिए।
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सुरक्षा और सुविधाओं का अभूतपूर्व घेरा
पूरे मेला क्षेत्र में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। 17 अस्थायी थाने, 42 पुलिस चौकियां और 17 फायर स्टेशन बनाए गए हैं। सफाई के लिए 3300 कर्मी लगातार काम कर रहे हैं। आवागमन के लिए हजारों बसें और ई-रिक्शा लगाए गए हैं, जबकि भीड़ नियंत्रण के लिए पांटून पुलों और एकतरफा मार्गों की व्यवस्था की गई है। इन तैयारियों को देखकर साधु-संत और श्रद्धालु संतुष्ट नजर आ रहे हैं और माघ मेले में आस्था के साथ सुरक्षा का मजबूत भरोसा भी दिखाई दे रहा है।