Maharashtra language Controversy: महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी की बहस ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य सरकार द्वारा पहली से पांचवीं कक्षा तक हिंदी को अनिवार्य करने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मीरा रोड की एक जनसभा में ठाकरे ने कहा कि यह महाराष्ट्र की अस्मिता पर सीधा हमला है और सरकार का यह कदम राज्य की पहचान को मिटाने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने दो टूक कहा कि मराठी भाषा का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो स्कूल तक बंद करवा दिए जाएंगे।
हिंदी थोपने पर मनसे का विरोध तेज
राज ठाकरे ने केंद्र और राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की योजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस और अब भाजपा की सरकार इसी एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। ठाकरे ने सवाल उठाया कि जब अन्य राज्यों में वहां की स्थानीय भाषा अनिवार्य है, तो महाराष्ट्र में मराठी को पीछे क्यों किया जा रहा है? उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि हिंदी थोपने की कोशिश जारी रही तो मनसे पूरे राज्य में आंदोलन छेड़ेगी।
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मीरा रोड की घटना को लेकर दी सफाई
मीरा रोड में मनसे कार्यकर्ताओं और कुछ लोगों के बीच झड़प को लेकर ठाकरे ने सफाई दी कि यह विरोध मराठी अस्मिता के समर्थन में था। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ने "यहां सिर्फ हिंदी चलेगी" जैसी टिप्पणी की, जिससे मामला भड़क गया। ठाकरे ने दुकानदारों से अपील की कि वे बिना मुद्दा समझे दुकानें बंद न करें। उन्होंने कहा कि मराठी व्यापारियों को भी अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए आगे आना होगा, क्योंकि यह सिर्फ भाषा का नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार का मुद्दा है।