Maharashtra UCC Live In Rights : महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार की ओर से बनाई गई समिति ने लोगों से पूछा है कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को भी गुजारा भत्ता और संपत्ति से जुड़े अधिकार मिलने चाहिए। यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि शादी के बिना साथ रहने वाले जोड़ों के रिश्ते में अलगाव होने पर आर्थिक सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठते हैं। समिति इन मामलों पर लोगों की राय जानना चाहती है।
क्या महिला को मिलेगा गुजारा भत्ता
समिति ने सवाल रखा है कि अगर लिव-इन रिश्ते में रहने वाली महिला का साथी उसे छोड़ देता है, तो क्या उसे आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि ऐसे रिश्तों में महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और संपत्ति में अधिकार मिलने चाहिए या नहीं। इन सवालों का मकसद यह समझना है कि ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों के अधिकारों को लेकर एक समान नियम बनाए जाने चाहिए या नहीं।
रिश्ते की शुरुआत और खत्म होने का पंजीकरण
समिति ने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े पंजीकरण पर भी लोगों की राय मांगी है। सवाल है कि क्या ऐसे रिश्ते की शुरुआत और उसके खत्म होने की जानकारी दर्ज कराना जरूरी होना चाहिए। इसके अलावा शादी, तलाक और विरासत से जुड़े नियमों पर भी सुझाव मांगे गए हैं। समिति यह जानना चाहती है कि अलग-अलग समुदायों में लागू व्यक्तिगत कानूनों के बीच समान नियम बनाने की जरूरत है या नहीं।
महिलाओं और बच्चों के अधिकार भी शामिल
यूसीसी समिति की प्रश्नावली में केवल लिव-इन रिश्तों की बात नहीं है। इसमें महिलाओं और पुरुषों को विरासत में बराबर अधिकार देने, बच्चों के भरण-पोषण और उनके भविष्य से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। समिति यह भी जानना चाहती है कि अलग-अलग समुदायों में विवाह और तलाक की प्रक्रिया के लिए समान नियम होने चाहिए या नहीं। इन सभी विषयों पर मिले सुझावों के आधार पर समिति अपनी सिफारिशें तैयार करेगी।
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15 नवंबर तक दे सकते हैं अपनी राय
महाराष्ट्र की यूसीसी समिति ने लोगों से 15 नवंबर 2026 तक अपने सुझाव देने को कहा है। इसके लिए विशेष वेबसाइट शुरू की गई है। लोग ऑनलाइन, ईमेल या डाक के जरिए भी अपनी राय भेज सकते हैं। समिति में पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना देसाई अध्यक्ष हैं। फिलहाल सरकार ने लिव-इन पार्टनर को संपत्ति या गुजारा भत्ता देने का कोई नया नियम लागू नहीं किया है। अभी केवल लोगों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद समिति अपनी सिफारिशें देगी और उसके बाद ही कानून को लेकर आगे का फैसला हो सकेगा।