Major success for DRDO: भारत ने रक्षा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर तकनीक के मामले में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अगली पीढ़ी के रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के लिए स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक विकसित की है। X-बैंड में काम करने वाली GaN आधारित MMIC तकनीक का सफल परीक्षण भी किया गया है। इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
छोटी चिप देगी 30 वॉट तक पावर
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, DRDO की विकसित स्वदेशी GaN चिप का आकार महज 3.5×3 मिलीमीटर है और यह 30 वॉट तक की पावर देने में सक्षम है। इस तकनीक को पारंपरिक सिलिकॉन आधारित तकनीक की तुलना में ज्यादा क्षमता वाला बताया गया है। इससे कम आकार के उपकरणों में बेहतर पावर और प्रदर्शन हासिल करने में मदद मिल सकती है।
रडार और जैमर में होगा इस्तेमाल
GaN तकनीक का इस्तेमाल रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैमर, संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण और ड्रोन जैसे रक्षा प्लेटफॉर्म में किया जा सकता है। DRDO की सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) ने इस तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रयोगशाला ने सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) वेफर्स के निर्माण की स्वदेशी प्रक्रिया भी विकसित की है।
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रक्षा उपकरण होंगे हल्के और ज्यादा ताकतवर
GaN और SiC जैसी उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक रक्षा उपकरणों के आकार और वजन को कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही, इनसे उपकरणों की पावर क्षमता और प्रदर्शन बेहतर होने की संभावना है। DRDO ने X-बैंड तक के रडार और दूसरी प्रणालियों में इस तकनीक का इस्तेमाल करके इसकी क्षमता प्रदर्शित की है। कम शोर वाले संकेतों को पकड़ने और मजबूत संकेत भेजने वाले उपकरणों के विकास में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
विदेशी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
अब तक भारत को GaN जैसे उन्नत सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स के लिए विदेशी स्रोतों पर काफी निर्भर रहना पड़ता था। कई देशों में ऐसी तकनीकों के निर्यात पर भी प्रतिबंध हैं। अब भारत स्वदेशी स्तर पर इन क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दे रहा है। इसके अलावा, iDEX पहल के तहत Agnit Semiconductors के साथ उन्नत GaN सेमीकंडक्टर विकसित करने के लिए समझौता भी किया गया है। इससे रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी सेमीकंडक्टर क्षमता मजबूत होने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।