दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आग लगने के बाद हालात इतने खराब कैसे हो गए। शुरुआती जांच में कई सुरक्षा खामियों की बात सामने आई है, जिनकी अब विस्तार से जांच की जा रही है।
छत तक पहुंचने में मुश्किल
जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, होटल की छत पर बने कमरे का रास्ता बाहर से बंद होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस वजह से कई लोग सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच सके। हालात ऐसे बने कि कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश की। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
मालिक के फरार होने का दावा
दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक, होटल मालिक लवकेश बजाज ने पूछताछ में माना है कि हादसे के बाद वह मौके से चला गया था। बताया गया है कि डर और घबराहट के कारण वह वहां से निकल गया। पुलिस का कहना है कि हादसे के बाद वह अपने घर भी नहीं गया और काफी समय तक इधर-उधर घूमता रहा। इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
ये भी पढ़ें : अब किराये पर मिलेगी मालगाड़ी, भारतीय रेल में शुरू हुआ बड़ा बदलाव
तीन साल पहले खरीदी थी बिल्डिंग
पूछताछ के दौरान लवकेश बजाज ने बताया कि उसने करीब तीन साल पहले यह इमारत खरीदी थी। उसके अनुसार, पहले यहां खादी से जुड़ा कारोबार चलता था। उसने दावा किया कि जब इमारत खरीदी गई थी, तब उसकी हालत काफी खराब थी। अब पुलिस दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड के जरिए इन दावों की पुष्टि करने में जुटी है।
अनुमतियों की जांच जारी
आरोपी ने यह भी दावा किया है कि उसके पास बेड एंड ब्रेकफास्ट, पर्यटन और रेस्टोरेंट संचालन से जुड़ी आवश्यक अनुमति थी। हालांकि पुलिस और संबंधित विभाग इन दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी मंजूरियों और सुरक्षा प्रमाणपत्रों की वैधता की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
चार दिन की पुलिस कस्टडी
गुरुवार को आरोपी को साकेत कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने लवकेश बजाज को चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि होटल में सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी, कमरों की संख्या कैसे बढ़ाई गई और कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई।