मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध ने भारतीय शेयर बाजार को हिला कर रख दिया है। गुरुवार को बाजार में ऐसी गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी। बीएसई सेंसेक्स करीब 2496 अंक टूटकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 775 अंक गिरकर 23,002 पर पहुंच गया। इस भारी गिरावट के चलते निवेशकों के करीब 12 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।
हर सेक्टर में बिकवाली का दबाव
बाजार में गिरावट का असर हर सेक्टर पर देखने को मिला। बैंकिंग, ऑटो, आईटी, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक जैसे प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। बड़े शेयरों से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप तक हर जगह बिकवाली हावी रही। खासतौर पर एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
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क्रूड ऑयल बना सबसे बड़ा कारण
इस क्रैश के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और तेल-गैस प्लांट्स पर हमले हैं। इसके चलते कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जिससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई। महंगे क्रूड का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर पड़ता है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
ग्लोबल संकेतों से बढ़ा डर
एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा। जापान, कोरिया और हांगकांग के बाजारों में कमजोरी ने निवेशकों के सेंटिमेंट को और बिगाड़ दिया। इसके साथ ही India VIX में 22 फीसदी की तेज उछाल ने बाजार में डर का माहौल साफ दिखा दिया।
घरेलू कारणों ने बढ़ाई गिरावट
ग्लोबल फैक्टर्स के अलावा घरेलू वजहों ने भी बाजार को झटका दिया। एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक का शेयर बुरी तरह टूटा, जिसने पूरे बैंकिंग सेक्टर को दबाव में ला दिया। इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार में बड़ी गिरावट को जन्म दिया और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।