बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश कैबिनेट विस्तार के बाद भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार को बीजेपी का आंतरिक राजनीतिक मामला जरूर बताया, लेकिन साथ ही साफ कहा कि इसका असर जनता के जीवन में भी दिखना चाहिए। मायावती ने कहा कि अगर सरकार के फैसलों से गरीब, किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं को राहत नहीं मिलती तो लोग इसे सिर्फ राजनीतिक जुगाड़ और सरकारी बोझ मानेंगे। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
एक्स पर लिखा बड़ा संदेश
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबा पोस्ट करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल सत्ताधारी पार्टी का आंतरिक फैसला होता है इसलिए इस पर ज्यादा टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का हर फैसला जनता की भलाई में दिखाई देना चाहिए। बसपा प्रमुख ने कहा कि गरीबों की स्थिति में सुधार, युवाओं को रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा में बदलाव महसूस होना जरूरी है।
कमजोर वर्गों का उठाया मुद्दा
बसपा सुप्रीमो ने अपने बयान में कमजोर और पिछड़े वर्गों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार और मंत्रियों की सबसे बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी समाज के हर वर्ग को सुरक्षा और न्याय देना है। मायावती ने कहा कि लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि उनके जान-माल और धर्म की रक्षा हो रही है। अगर ऐसा नहीं होता तो सरकार के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके इस बयान को विपक्ष के बड़े हमले के तौर पर देखा जा रहा है।
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ब्राह्मण समाज का भी जिक्र
मायावती ने हाल ही में लखनऊ में भाजपा से जुड़े एक युवा ब्राह्मण नेता पर हुए जानलेवा हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद प्रदेश में कानून व्यवस्था और ब्राह्मण समाज की सुरक्षा को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है। बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि यूपी में ब्राह्मण समाज खुद को उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और सरकार को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए।
बसपा सरकारों का दिलाया याद
अपने बयान में मायावती ने अपनी सरकारों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि बसपा शासनकाल में समाज के हर वर्ग को न्याय और सुरक्षा मिली थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकारों ने सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की नीति पर काम किया। मायावती के मुताबिक बसपा सरकारों में कानून व्यवस्था मजबूत थी और हर धर्म तथा जाति के लोगों को बराबरी का संरक्षण मिलता था। उन्होंने अपने पुराने शासन मॉडल को बेहतर बताते हुए मौजूदा सरकार पर निशाना साधा।
सियासत में बढ़ी हलचल
कैबिनेट विस्तार के तुरंत बाद मायावती के इस बयान ने यूपी की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक तरफ बीजेपी नए मंत्रियों के जरिए सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटी है तो दूसरी तरफ विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है। मायावती का बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन का मुद्दा और ज्यादा गर्म हो सकता है।