MCD big decision: दिल्ली नगर निगम (MCD) ने व्यापारियों और नागरिकों को राहत देते हुए ट्रेड लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाने का बड़ा फैसला लिया है। अब जनरल ट्रेड/स्टोरेज लाइसेंस फीस को प्रॉपर्टी टैक्स प्रणाली के साथ जोड़ दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य “Ease of Doing Business” को बढ़ावा देना और अनुपालन से जुड़ी जटिलताओं को कम करना है।
नई व्यवस्था से प्रक्रिया हुई आसान
नई व्यवस्था के तहत अब अलग से ट्रेड लाइसेंस के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। पहले दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 417 के तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य था, लेकिन अब इस प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। जिन संपत्तियों के पास यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन कोड (UPIC) है, वे सीधे प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल के माध्यम से टैक्स के साथ ही लाइसेंस फीस जमा कर सकेंगे।
15% फीस के रूप में होगा भुगतान
एमसीडी ने लाइसेंस फीस को युक्तिसंगत बनाते हुए इसे संबंधित संपत्ति के प्रॉपर्टी टैक्स का 15% निर्धारित किया है। यह भुगतान हर साल प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ही किया जाएगा। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी तथा व्यापारियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
यह भी देखेंःSupreme Courts Decision: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, टीएमसी की याचिका खारिज, कपिल सिब्बल की दलीलें नहीं आईं काम
रसीद ही मानी जाएगी वैध लाइसेंस
नई प्रणाली के तहत प्रॉपर्टी टैक्स के साथ फीस जमा करने पर मिलने वाली रसीद को ही वैध जनरल ट्रेड/स्टोरेज लाइसेंस माना जाएगा। यह “डिम्ड लाइसेंस” एक वित्तीय वर्ष तक मान्य रहेगा और प्रॉपर्टी टैक्स अवधि के साथ ही समाप्त होगा, जिससे नवीनीकरण की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी।
नियमों के पालन की जिम्मेदारी बरकरार
हालांकि प्रक्रिया सरल हुई है, लेकिन व्यापार संचालकों को प्रदूषण नियंत्रण, अग्नि सुरक्षा और अन्य कानूनी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति ही जिम्मेदार होगा। यह कदम प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे दिल्ली के नागरिकों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा।