Supreme Courts Decision: नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया। इस मामले में टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा, लेकिन कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी। याचिका में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों पर सवाल उठाए गए थे, जिन्हें अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
कपिल सिब्बल की दलीलें
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग एकतरफा फैसले नहीं ले सकता। उन्होंने आशंका जताई कि एडिशनल चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (ACEO) के आदेश से मतगणना प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सिब्बल ने यह भी कहा कि चुनाव में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
टीएमसी की आपत्तियां
टीएमसी ने सवाल उठाया कि काउंटिंग सुपरवाइजर के रूप में राज्य सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही है। पार्टी का कहना था कि यह संविधान के अनुच्छेद 324 की भावना के खिलाफ है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग राज्य के कर्मचारियों पर अविश्वास जता रहा है और मनमानी तरीके से निर्णय ले रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य और केंद्र दोनों के कर्मचारी चुनाव आयोग के अधीन कार्य करते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि मतगणना प्रक्रिया में केवल सुपरवाइजर ही नहीं, बल्कि प्रत्याशियों के प्रतिनिधि और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहेंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।
चुनाव आयोग का पक्ष और आगे की स्थिति
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि एक कर्मचारी राज्य सरकार से भी शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने आयोग के इस जवाब को रिकॉर्ड पर लिया और उसके सर्कुलर में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में हुए चुनावों के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे, जिन पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।