देशभर में आज 15 लाख से ज्यादा दवा दुकानों पर ताले लगे रहेंगे। खुदरा दवा कारोबारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का एलान किया है। इस बंद का आह्वान ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने किया है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री, कॉर्पोरेट कंपनियों की बढ़ती ताकत और नई तकनीक आधारित सिस्टम के कारण छोटे कारोबारियों का अस्तित्व संकट में आ गया है।
क्या हैं कारोबारियों की बड़ी मांगें
दवा विक्रेताओं का कहना है कि कोरोना काल के दौरान सरकार ने मरीजों तक दवाएं पहुंचाने के लिए कुछ विशेष छूट दी थीं। लेकिन महामारी खत्म होने के बाद भी उन नियमों को जारी रखा गया है। संगठन की मांग है कि उन अधिसूचनाओं को वापस लिया जाए क्योंकि इनका गलत इस्तेमाल हो रहा है और इससे ऑनलाइन कारोबार तेजी से बढ़ा है।
फर्जी दवाओं पर भी उठाए सवाल
संगठन के अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन माध्यम से डॉक्टर की पर्ची के बिना भी कई दवाएं बेची जा रही हैं। इनमें एंटीबायोटिक और प्रतिबंधित दवाएं भी शामिल हैं। उनका कहना है कि इससे युवाओं और आम लोगों की सेहत पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही बाजार में नकली दवाओं के पहुंचने का जोखिम भी बढ़ रहा है।
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भारी छूट से छोटे व्यापारियों में नाराजगी
दवा कारोबारियों का आरोप है कि ऑनलाइन कंपनियां 20 से 50 प्रतिशत तक छूट देकर बाजार पर कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी छूट देना छोटे दुकानदारों के लिए संभव नहीं है। इससे पारंपरिक दवा दुकानों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है और हजारों परिवारों की आय पर असर पड़ रहा है।
इमरजेंसी सेवाओं को रखा गया अलग
हालांकि इस बंद के दौरान जरूरी चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित नहीं किया जाएगा। अस्पतालों से जुड़ी मेडिकल दुकानें खुली रहेंगी और आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता बनी रहेगी। संगठन ने साफ किया है कि मरीजों को परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
कब तक रहेगा असर
दवा कारोबारियों के मुताबिक यह बंद केवल एक दिन के लिए रखा गया है और बुधवार शाम से दुकानें दोबारा खुलनी शुरू हो जाएंगी। हालांकि इस हड़ताल ने स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा बाजार से जुड़े कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है।