Delhi Red Fort Blast Case: दिल्ली में हुए धमाके में जैश-ए-मोहम्मद के हाथ होने की आशंका जाहिर की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस डॉक्टर ने दिल्ली लाल किले के पास धमाके को अंजाम दिया था, वो जैश-ए-मोहम्मद के मॉड्यूल का मेंबर था। वहीं, जांच में एक और नाम सामने आया है, जिसे कट्टरपंथ का उस्ताद कहा जा रहा है, वो नाम मौलवी इरफान है। मौलवी इरफान मेडिकल कॉलेज के छात्रों को कट्टरपंथ की राह पर ले जाने का काम करता था और उसी के जरिए ‘फरीदाबाद मॉड्यूल’का नेटवर्क खड़ा हुआ।
जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल का मेंबर था
एक अफसर ने बताया कि डॉ. उमर जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल का मेंबर था। लेकिन हरियाणा, यूपी और जम्मू-कश्मीर में ताबड़तोड एक्शन से डॉ. उमर प्रेशर में आ गया है। फरीदाबाद में हुई छापेमारी के बाद डॉ. उमर ने अल फला मेडिकल कॉलेज कैंपस, फरीदाबाद से अपनी लोकेशन बदल दी। सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद यह साबित हुआ है कि डॉ. उमर ही कार चला रहा था, जिसमें धमाका हुआ। यह वही विस्फोटक था जो फरीदाबाद के ठिकानों से मिला था।
कट्टरपंथ का उस्ताद मौलवी इरफान
वहीं दिल्ली में हुए धमाके के बाद पुलिस जांच में जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक ऐसे नाम तक पहुंची है, जिसे कट्टरपंथ का उस्ताद कहा जा रहा है, वो नाम मौलवी इरफान है। यह जीएमसी श्रीनगर का पूर्व पैरामेडिकल कर्मचारी है। आरोप है कि मौलवी के निशाने पर मेडिकल स्टूडेंट्स और युवा डॉक्टर्स थे। इनमें से ही कुछ दिल्ली में सोमवार को हुए कार ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले फरीदाबाद में पकड़े गए, जो नेटवर्क के संदिग्ध सदस्य बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इरफान मेडिकल कॉलेज के छात्रों को कट्टरपंथ की राह पर ले जाने का काम करता था और उसी के जरिए ‘फरीदाबाद मॉड्यूल’ का नेटवर्क खड़ा हुआ।
शोपियां जिले से रखता है ताल्लुक
मौलवी इरफान जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले से ताल्लुक रखता है। काफी लंबे समय से इरफान जांच एजेंसियों की नजर में था। दिल्ली के हालिया लाल किला ब्लास्ट केस की जांच में उसका नाम उभरकर सामने आया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इरफान इस मॉड्यूल का 'मुख्य चेहरा' था। सूत्रों के मुताबिक, वह अपनी नौकरी और नमाज का इस्तेमाल मेडिकल स्टूडेंट्स को साधने, जज्बाती युवाओं की पहचान करने और उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलने के लिए करता था।
घर से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
इरफान ने मेडिकल प्रोफेशनल्स की भर्ती, फंडिंग जुटाने, लॉजिस्टिक सपोर्ट और आईईडी के लिए सामग्री की व्यवस्था तक का काम संभाला। पुलिस ने बताया कि उसके घर से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच चल रही है। 19 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर के नौगम में जेईएम पोस्टर मिलने से जांच शुरू हुई। तीन ओजीडब्ल्यू आरिफ निसार डार, यासिर-उल-अशरफ, मकसूद अहमद डार की गिरफ्तारी से इरफान तक पुलिस और एजेंसियों की पहुंच बनी। इस मामले में UAPA, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था।