सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने साफ कहा कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद कोर्ट उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि चुनाव से जुड़े मामलों में तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। इस फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका लगा है और राज्यसभा चुनाव का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
नामांकन रद्द होने पर पहुंची थीं कोर्ट
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र जांच के दौरान रद्द कर दिया गया था। उनका कहना था कि चुनाव अधिकारी ने गलत आधार पर उनका पर्चा खारिज किया है। उन्होंने अदालत में दलील दी कि उनके खिलाफ जिस मामले का जिक्र किया जा रहा है, उसमें अभी आरोप तय नहीं हुए हैं और मामले का संज्ञान भी नहीं लिया गया है। इसलिए नामांकन रद्द करना गलत और मनमाना फैसला है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी याचिका चुनाव रोकने के लिए नहीं बल्कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है।
चुनाव आयोग और सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। उनका कहना था कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं बल्कि कानूनी अधिकार है। इसलिए इस मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी उम्मीदवार का नामांकन रद्द होता है तो उसके खिलाफ चुनाव याचिका ही एकमात्र कानूनी रास्ता होता है। इसी आधार पर अदालत से याचिका खारिज करने की मांग की गई थी।
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नामांकन क्यों हुआ था खारिज?
बीजेपी की ओर से शिकायत की गई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामे में एक लंबित मामले की जानकारी नहीं दी। आरोप था कि तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक अदालती शिकायत का जिक्र नहीं किया गया। जांच के दौरान चुनाव अधिकारी ने इसे महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना माना और नामांकन पत्र रद्द कर दिया। इसी फैसले को चुनौती देने के लिए मीनाक्षी नटराजन सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं।
बीजेपी उम्मीदवार को मिला फायदा
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद तीसरी सीट पर मुकाबला खत्म हो गया। इससे बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया। अब इस सीट पर मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी और बीजेपी को सीधा फायदा मिलेगा।
कांग्रेस के सामने नई चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पार्टी पहले ही इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और अदालत के सामने अपनी बात रख चुकी थी, लेकिन राहत नहीं मिली। अब कांग्रेस के पास आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प बचा है। वहीं बीजेपी इस फैसले को अपनी बड़ी जीत मान रही है। राज्यसभा चुनाव से पहले आए इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।