मेरठ में अवैध निर्माण और भू-उपयोग परिवर्तन को लेकर बड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए संपत्ति मालिकों को साफ चेतावनी दी है कि वे 15 दिनों के भीतर अपने अवैध निर्माण खुद हटा लें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रशासन बुलडोजर चलाकर निर्माण गिरा देगा। यह आदेश खासतौर पर उन भवनों पर लागू होगा जिन्हें पहले से सील किया जा चुका है।
15 दिन का अल्टीमेटम
कोर्ट ने साफ कहा है कि जिन भवनों में सेटबैक क्षेत्र में अवैध निर्माण किया गया है, उन्हें 15 दिनों के अंदर हटाना होगा। यह नियम सिर्फ सील भवनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी अवैध निर्माणों पर लागू होगा। यानी अब किसी भी तरह की ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि अब अवैध निर्माण करने वालों को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
तोड़फोड़ का खर्च भी खुद देना होगा
इस आदेश का एक अहम पहलू यह भी है कि अगर आवंटी खुद अवैध निर्माण नहीं हटाते हैं और प्रशासन को बुलडोजर चलाना पड़ता है, तो उसकी पूरी लागत भी संबंधित संपत्ति मालिक से ही वसूली जाएगी। यानी न सिर्फ निर्माण गिरेगा, बल्कि आर्थिक बोझ भी उसी पर पड़ेगा जिसने नियमों का उल्लंघन किया है। इससे लोगों पर दोहरी मार पड़ सकती है।
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सरकार से मांगी गई पॉलिसी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को भी आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने पूछा कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और भू-उपयोग परिवर्तन को लेकर स्पष्ट नीति क्यों नहीं है। अब सरकार को कोर्ट के सामने एक ठोस और स्पष्ट पॉलिसी पेश करनी होगी, जिससे यह तय हो सके कि किन परिस्थितियों में भू-उपयोग बदला जा सकता है और किन मामलों में नहीं।
मेरठ में बढ़ेगी सख्ती
इस फैसले के बाद मेरठ में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई होने की संभावना है। आवास विकास परिषद अब ज्यादा सख्ती के साथ कार्रवाई कर सकती है। इससे उन लोगों में भी हलचल मच गई है, जिन्होंने नियमों को नजरअंदाज कर निर्माण कराया है।
अगली सुनवाई पर नजर
इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को तय की गई है। तब तक सरकार को अपनी पॉलिसी तैयार कर कोर्ट के सामने पेश करनी होगी। फिलहाल कोर्ट के इस आदेश ने साफ कर दिया है कि अब नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए कोई नरमी नहीं होगी और कानून का पालन हर हाल में करना होगा।