
उत्तर प्रदेश के मेरठ-करनाल हाइवे स्थित भूनी टोल प्लाजा पर सेना के जवान कपिल के साथ हुई मारपीट का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। 18 अगस्त की इस घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने टोल प्लाजा पर जमकर तोड़फोड़ की थी। अब टोल कंपनी की तहरीर पर पुलिस ने 180 अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तोड़फोड़ और जाम से हाइवे ठप
जवान के साथ मारपीट की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण टोल प्लाजा पर जुट गए थे। गुस्साई भीड़ ने बैरियर बूम, कैमरे, एलसीडी डिस्प्ले, रीडिंग सेंसर और बूथ को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इतना ही नहीं, कंट्रोल रूम में घुसकर एसी, कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य उपकरणों को भी तोड़ डाला गया। इस उपद्रव के चलते हाइवे पर लंबा जाम लग गया और यात्री घंटों परेशान रहे।
टोल कंपनी का दावा – लाखों का नुकसान
तोड़फोड़ से नाराज टोल कंपनी ‘मेसर्स धर्म सिंह’ की ओर से आईटी हेड अमित कुमार ने थाने में शिकायत दी। उनका कहना है कि कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इसी शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात 180 ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस जुटी पहचान में
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि टोल पर लगे सीसीटीवी कैमरों और वायरल वीडियो की फुटेज खंगाली जा रही है। जल्द ही तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें नामजद किया जाएगा। इसके बाद एफआईआर में संशोधन किया जाएगा।
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ग्रामीणों में आक्रोश बरकरार
ग्रामीणों का आरोप है कि विवाद की जड़ खुद टोलकर्मी हैं। उनका कहना है कि सेना के जवान के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई, जिसके विरोध में लोग भड़के। ग्रामीणों ने जवान के सम्मान में धरना दिया और हंगामा किया था।
नेताओं के आश्वासन के बाद खत्म हुआ था धरना
ग्रामीणों का ये भी कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक संगीत सोम और भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा मौके पर मौजूद थे। उस समय प्रशासन ने उन्हें भरोसा दिया था कि किसी ग्रामीण पर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। इस आश्वासन पर ही धरना समाप्त किया गया। लेकिन अब केस दर्ज होने से ग्रामीण खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं और प्रशासन पर वादा खिलाफी का आरोप लगा रहे हैं।
यह मामला फिलहाल शांत होने की बजाय और गरमाता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जवान को न्याय नहीं मिलता और झूठे मुकदमे वापस नहीं लिए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।