
मेरठ के भामाशाह पार्क में आयोजित जगदगुरु रामभद्राचार्य की कथा के भूमि पूजन कार्यक्रम को लेकर शुक्रवार को पूरे दिन अफरा-तफरी का माहौल रहा। तय समय दोपहर 1 बजे भूमि पूजन होना था, लेकिन प्रशासन से अनुमति न मिलने के कारण कार्यक्रम शुरू नहीं हो पाया। जैसे ही आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे, आयोजकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बातचीत तेज हो गई।
प्रशासन ने रोका, आयोजक अड़े
इस दौरान आयोजक हर हाल में भूमि पूजन कराने पर अड़े थे, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना था कि अनुमति की औपचारिकताएं पूरी किए बिना कार्यक्रम नहीं हो सकता। इस खींचतान में भूमि पूजन का शुभ मुहूर्त भी निकल गया। आयोजक लगातार अधिकारियों से गुहार लगाते रहे कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए कार्यक्रम की इजाज़त दी जाए।
कशमकश के बाद शुरू हुआ भूमि पूजन
वहीं करीब एक घंटे की खींचतान और समझाइश के बाद आखिरकार प्रशासन ने शर्तों के साथ भूमि पूजन की अनुमति दे दी। इसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई और माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग गया। आयोजन को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं, इसलिए श्रद्धालुओं में काफी उत्सुकता थी।
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वाजपेयी की मौजूदगी से बदला माहौल
इस भूमि पूजन कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी पहुंचे। उनके पहुंचते ही स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं में जोश बढ़ गया। भारी संख्या में स्थानीय लोग भूमि पूजन देखने पहुंचे। इस दौरान अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश शुरू हो गई, लेकिन श्रद्धालु डटे रहे।
भव्य कथा का होगा आगाज़
आयोजकों ने जानकारी देते हुए बताया कि भूमि पूजन के साथ ही जगदगुरु रामभद्राचार्य की कथा के भव्य आयोजन की औपचारिक शुरुआत हो गई है। आने वाले दिनों में यही कथा का केंद्र बनेगा और यहां रोजाना धार्मिक अनुष्ठान होंगे।
प्रशासन और आयोजकों के बीच चली खींचतान के बावजूद भामाशाह पार्क में भूमि पूजन संपन्न हो गया। श्रद्धालुओं का उत्साह और नेताओं की मौजूदगी ने माहौल को और भी खास बना दिया।