Meta Kids Safety Rules: Meta सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई कर रहा है। बच्चे से लेकर बड़े तक रात में जाग-जागकर सोशल मीडिय पर एक्टिव रहते हैं। सोशल मीडिया के लत को कम करने के लिए मेटा अपने प्लेटफॉर्म्स पर कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। बच्चों और युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इंस्टाग्राम और फेसबुक पर नया डिजिटल बेडटाइम फीचर लाया जा रहा है।
रात 12 से सुबह 6 बजे तक नो एक्सेस
बता दें कि रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ऐप का इस्तेमाल रोका जाएगा। साथ ही रात के समय और स्कूल के दौरान नोटिफिकेशन को कम कर दिया जाएगा। मेटा ने इसे लेकर ट्रायल शुरू कर दिया है। देखा जाए तो एक तरफ जहां पहले इंस्टाग्राम-फेसबुक लोगों को इन एप पर बने रहने के लिए मजबूर करते थे, वहीं अब बच्चों के सोने का समय डिसाइड करने में मदद करेंगे।
पैरेंटल कंट्रोल और सेफ्टी
सोशल मीडिया पर बच्चों की एक्टिविटी को कम करने के लिए नाबालिगों के पोस्ट पर लाइक और रिएक्शन की गिनती गायब हो जाएगी। इसके अलावा कॉस्मेटिक सर्जरी वाले ब्यूटी फिल्टर भी बैन किए जाएंगे। टीनएजर्स को नॉन पर्सनलाइज्ड फीड चुनने का विकल्प मिलेगा, ताकि ऐप उन्हें अपनी लत में न फंसा सके। लगातार स्क्रॉल करने की आदत को भी बीच-बीच में रोका जाएगा। इसके अलावा एज वेरिफिकेशन और माता-पिता के कंट्रोल को और मजबूत बनाया जाएगा।
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1.6 लाख करोड़ के सेटलमेंट के बाद लिया फैसला
अमेरिका के 47 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मेटा पर आरोप लगाया था कि उसने जानबूझकर फेसबुक और इंस्टाग्राम को इस तरह डिजाइन किया, जिससे बच्चों को इसकी लत लगे। राज्यों ने कंपनी पर आरोप लगाया कि उसे पता था कि उसके प्रोडक्ट्स से मेंटल और फिजिकल नुकसान हो सकता है, जबकि वह माता-पिता और जनता को इन खतरों के बारे में गुमराह कर रही थी।
अपनी कमाई और यूजर ग्रोथ पर देती है ज्यादा ध्यान
अदालत में कंपनी के ही पूर्व सेफ्टी इंजीनियर आर्टुरो बेजार की गवाही से खुलासा हुआ कि मेटा सेफ्टी से ज्यादा ध्यान अपनी कमाई और यूजर ग्रोथ पर देती थी। उन्होंने कहा कि मेटा ने खुद को एक ऐसी कंपनी को दिखाया जो समस्या को समझती थी लेकिन रेवेन्यू जेनरेट करने वाली मशीनरी से ज्यादा बच्चों की भलाई को आगे रखने में संघर्ष करती थी।