माइकल बेवन को दुनिया का पहला असली फिनिशर माना जाता है। आज क्रिकेट में फिनिशर शब्द बेहद आम हो चुका है लेकिन इस भूमिका को पहचान दिलाने का सबसे बड़ा श्रेय बेवन को जाता है। जब भी ऑस्ट्रेलिया मुश्किल में फंसती थी तब बेवन शांत दिमाग के साथ मैच को आखिर तक ले जाते और टीम को जीत दिलाते। 8 मई को 56 साल के हुए बेवन ने वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजी की एक नई शैली दुनिया को दिखाई। उन्होंने साबित किया कि क्रिकेट सिर्फ बड़े शॉट्स का खेल नहीं बल्कि धैर्य और समझदारी का भी खेल है।
वनडे में शानदार रिकॉर्ड
माइकल बेवन दुनिया के सबसे बेहतरीन लिमिटेड ओवर्स बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 232 वनडे मुकाबलों में 53.58 की औसत से 6912 रन बनाए। उनके नाम 6 शतक और 46 अर्धशतक दर्ज हैं। सबसे खास बात यह रही कि वह 67 बार नाबाद लौटे। उस दौर में 50 से ऊपर का औसत बेहद असाधारण माना जाता था। बेवन की बल्लेबाजी में चौके-छक्कों की चमक भले कम थी लेकिन मैच जिताने की क्षमता सबसे ज्यादा थी। गैप में शॉट खेलना और दबाव में रन बनाना उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी।
यादगार पारियों के हीरो
बेवन ने अपने करियर में कई ऐसी पारियां खेलीं जिन्हें आज भी क्रिकेट इतिहास में याद किया जाता है। 1996 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सिडनी में खेली गई पारी और 2002 में न्यूजीलैंड के खिलाफ मेलबर्न में मैच जिताने वाली बल्लेबाजी आज भी फैंस नहीं भूले हैं। उन्होंने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ साझेदारी कर कई असंभव मुकाबले ऑस्ट्रेलिया को जिताए। बेवन ने ऑस्ट्रेलिया को 1999 और 2003 का वनडे वर्ल्ड कप जिताने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
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टेस्ट में नहीं मिला वैसा साथ
वनडे क्रिकेट में महान सफलता के बावजूद माइकल बेवन टेस्ट क्रिकेट में खुद को ज्यादा साबित नहीं कर सके। उन्होंने 18 टेस्ट मैचों में 785 रन बनाए और उनका औसत 29.07 रहा। पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू सीरीज में उन्होंने शानदार शुरुआत की थी लेकिन बाद में शॉर्ट बॉल के खिलाफ कमजोरी सामने आने लगी। यही वजह रही कि उनका टेस्ट करियर लंबा नहीं चल पाया। हालांकि घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन लगातार शानदार बना रहा।
धोनी से पहले फिनिशर
महेंद्र सिंह धोनी को दुनिया के महान फिनिशर्स में गिना जाता है लेकिन उससे पहले माइकल बेवन ने इस भूमिका की नींव रखी थी। बल्लेबाजी के अलावा वह शानदार फील्डर और उपयोगी स्पिन गेंदबाज भी थे। इंटरनेशनल क्रिकेट में उन्होंने 65 विकेट भी लिए। करियर के आखिरी दौर में चोटों ने उन्हें परेशान किया और जनवरी 2007 में उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया। लेकिन आज भी वनडे क्रिकेट में फिनिशिंग की बात होती है तो माइकल बेवन का नाम सबसे पहले याद किया जाता है।