अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस तेजी से बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की है।
भारतीय दूतावासों ने जारी की चेतावनी
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए ईरान, इजरायल, सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और फिलिस्तीन में मौजूद भारतीय दूतावासों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्हें स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा और आपातकालीन निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे के कदम उठाए जा सकते हैं।
खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी जीसीसी देशों में विदेशियों में भारतीयों की आबादी सबसे ज्यादा है। आंकड़ों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात में करीब 43.26 लाख भारतीय रहते हैं, जबकि सऊदी अरब में यह संख्या लगभग 27.47 लाख है। इसके अलावा कुवैत में 10.36 लाख, कतर में 8.30 लाख, ओमान में 6.76 लाख और बहरीन में करीब 3.17 लाख भारतीय रहते हैं। कुल मिलाकर लगभग 99.34 लाख यानी करीब एक करोड़ भारतीय इन देशों में काम और व्यवसाय कर रहे हैं।
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भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा बड़ा रिश्ता
खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों से आने वाला पैसा भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत को कुल 118.7 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला था। इसमें से लगभग 37.9 प्रतिशत यानी करीब 45 अरब डॉलर (करीब 4.12 लाख करोड़ रुपये) जीसीसी देशों से आया। अकेले यूएई का हिस्सा लगभग 19.2 प्रतिशत रहा, जबकि सऊदी अरब और कुवैत का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
रेमिटेंस में जीसीसी का घटता हिस्सा
हालांकि समय के साथ खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस का प्रतिशत थोड़ा घटा है। वित्त वर्ष 2016-17 में इसका हिस्सा लगभग 46.7 प्रतिशत था, जो 2023-24 में घटकर 37.9 प्रतिशत रह गया। इसके बावजूद यह भारत के लिए विदेशी आय का एक बड़ा स्रोत बना हुआ है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक भारत 2024 में भी दुनिया का सबसे ज्यादा रेमिटेंस पाने वाला देश बना रहा।
सबसे व्यस्त एयर कॉरिडोर बना भारत-गल्फ रूट
भारत और खाड़ी देशों के बीच हवाई संपर्क भी बेहद मजबूत है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के अनुसार विंटर 2025 शेड्यूल में हर सप्ताह 26,495 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को मंजूरी दी गई थी और रोज औसतन 3,785 उड़ानें संचालित हुईं। इनमें गल्फ क्षेत्र सबसे बड़ा सेगमेंट रहा। हालांकि हालिया तनाव और एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण फरवरी-मार्च 2026 के दौरान 170 से ज्यादा उड़ानें रद्द या देर से संचालित हुईं।
रोजाना हजारों भारतीय जाते हैं खाड़ी
ई-माइग्रेट पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में जीसीसी देशों के लिए 3,98,316 इमिग्रेशन क्लियरेंस जारी किए गए। इसका मतलब है कि रोज औसतन 1,091 भारतीय काम के लिए खाड़ी देशों की ओर जाते हैं। इनमें ज्यादातर लोग ब्लू कॉलर नौकरियों से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में लंबे समय तक भू-राजनीतिक अस्थिरता बनी रहती है, तो इसका असर भारतीय कामगारों, रेमिटेंस और हवाई कनेक्टिविटी पर भी पड़ सकता है।