मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब सिर्फ क्षेत्रीय तनाव तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा. इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. आईएमएफ की पूर्व डिप्टी एमडी और हार्वर्ड प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने भारत को लेकर बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो भारत को ईंधन, महंगाई और मुद्रा के मोर्चे पर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
तीन बड़े खतरों का अलर्ट
गीता गोपीनाथ ने भारत के लिए तीन बड़े जोखिम गिनाए हैं. पहला पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, दूसरा महंगाई का दबाव और तीसरा रुपये की कमजोरी. उनका कहना है कि भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी निर्भर है. ऐसे में अगर सप्लाई प्रभावित होती है तो उसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है.
तेल से लेकर गैस तक असर
उन्होंने कहा कि संकट सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है. एलपीजी, एलएनजी और खाद जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है. अब चिंता सिर्फ कीमतों की नहीं बल्कि उपलब्धता की भी है. यदि वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता है तो भारत समेत कई देशों को इसका असर झेलना पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें : PF निकालने का झंझट खत्म होने वाला? अब फोन पर कुछ टैप और खाते में पहुंचेगा पैसा
140 डॉलर तक पहुंच सकता तेल
गीता गोपीनाथ ने आशंका जताई कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. उन्होंने कहा कि जून तक स्थिति और गंभीर हो सकती है. ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए नई चुनौती बन सकती है.
पेट्रोल-डीजल और रुपया दोनों चिंता
ईंधन महंगा होने से देश में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार के सामने विकल्प सीमित हैं क्योंकि यह बाहरी संकट है. इसके साथ ही रुपये में गिरावट को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई. उनका कहना है कि मुद्रा के एक स्तर पर पहुंचने से ज्यादा जरूरी रोजगार, उत्पादन और आर्थिक मजबूती है.
क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?
हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी देखी गई है. ऊर्जा विशेषज्ञ भी आने वाले समय में कीमतें और बढ़ने की संभावना जता रहे हैं. हालांकि गीता गोपीनाथ ने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कई मजबूत पक्ष मौजूद हैं और घबराने की जरूरत नहीं है. लेकिन आने वाले दिनों में बाजार की चाल पर सभी की नजर रहने वाली है.