Middle East tensions: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहरा असर डाला है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए इस तनाव के चलते हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों और इजराइल को निशाना बनाया, जिससे तेल और गैस आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका असर भारत समेत कई देशों की ऊर्जा रणनीति पर साफ नजर आ रहा है।
सरकार का बड़ा फैसला
इस वैश्विक संकट के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गैर-घरेलू एलपीजी के आवंटन में बढ़ोतरी का फैसला किया है, ताकि औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर को राहत मिल सके।
70% तक बढ़ा आवंटन
नए निर्देशों के तहत राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी का कुल कोटा बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले यह आवंटन 50 प्रतिशत के आसपास था, जिसे अब बढ़ाकर उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इससे उन क्षेत्रों को सीधा फायदा मिलेगा जहां पाइप्ड गैस की सुविधा सीमित है।
उद्योगों को मिलेगा सहारा
इस फैसले से खासतौर पर छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो उत्पादन के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। बढ़ती वैश्विक कीमतों और आपूर्ति संकट के बीच यह कदम उत्पादन गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करेगा।
ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस
सरकार का यह निर्णय दर्शाता है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो सरकार द्वारा और भी कदम उठाए जा सकते हैं ताकि देश में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित न हो।