Modi and Korean President: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-योल ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में मुलाकात के दौरान ‘सीता अशोक’ का पौधा लगाया। यह पौधा प्रतीकात्मक रूप से बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इसे बाद में अयोध्या ले जाकर रोपा जाएगा। यह पहल भारत और दक्षिण कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
सांस्कृतिक महत्व
‘सीता अशोक’ का पेड़ भारतीय परंपरा और रामायण से गहराई से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि माता सीता को लंका में जिस वाटिका में रखा गया था, वह अशोक के पेड़ों से घिरी थी, जिसे ‘अशोक वाटिका’ कहा जाता है। ‘अशोक’ का अर्थ ही होता है शोक को दूर करने वाला। वैज्ञानिक रूप से इसे सराका असोका कहा जाता है और आयुर्वेद में भी इसका विशेष महत्व है।
अयोध्या से कोरिया तक
अयोध्या और दक्षिण कोरिया का संबंध सदियों पुराना बताया जाता है। मान्यता के अनुसार अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना समुद्री मार्ग से कोरिया पहुंचीं और वहां के राजा किम सू-रो से विवाह किया। विवाह के बाद उन्हें हियो ह्वांग-ओक के नाम से जाना गया। आज भी दक्षिण कोरिया में बड़ी संख्या में लोग खुद को उनका वंशज मानते हैं।
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कोरियाई नागरिक
इस ऐतिहासिक संबंध के चलते हर साल हजारों दक्षिण कोरियाई नागरिक अयोध्या पहुंचते हैं। वे सरयू नदी के तट पर जाकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव महसूस करते हैं। यहां रानी हियो ह्वांग-ओक की याद में एक स्मारक और पार्क भी बनाया गया है, जिसमें दक्षिण कोरिया सरकार का सहयोग रहा है।
भावनात्मक जुड़ाव
नई दिल्ली में ‘सीता अशोक’ का पौधा लगाना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों का प्रतीक है। जब यह पौधा अयोध्या की पवित्र भूमि में लगाया जाएगा, तो यह आने वाली पीढ़ियों को भारत और दक्षिण कोरिया के इस ऐतिहासिक रिश्ते की याद दिलाता रहेगा।