Modi Cabinet Reshuffle : बीजेपी संगठन की नई टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सियासी गलियारों में अटकलें हैं कि कैबिनेट में कुछ वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं, जबकि कई नए और युवा चेहरों को जगह मिल सकती है। माना जा रहा है कि संभावित बदलाव में 2027 के विधानसभा चुनावों के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति भी अहम होगी।
मंत्रियों के प्रदर्शन पर हो रहा मंथन
कैबिनेट में बदलाव की चर्चा के बीच मंत्रियों के कामकाज और जमीनी पकड़ को लेकर भी समीक्षा की बात सामने आ रही है। बीजेपी के भीतर यह माना जा रहा है कि चुनावी तैयारी के लिए सरकार के मंत्रियों का जनता के बीच सक्रिय रहना जरूरी है। इसी वजह से कुछ बड़े मंत्रालयों में जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की संभावना जताई जा रही है। कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग होने के कारण भी विभागों के बंटवारे पर फैसला हो सकता है।
अश्विनी वैष्णव की जिम्मेदारी बढ़ने के संकेत
चर्चाओं में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम खास तौर पर सामने आ रहा है। फिलहाल उनके पास रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी जैसे अहम विभाग हैं। राजनीतिक चर्चा के मुताबिक उनके कामकाज को देखते हुए उन्हें कैबिनेट में और महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है। कुछ जिम्मेदारियां उनसे लेकर दूसरे मंत्रियों को सौंपे जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
ये भी पढ़ें : सोना खरीदने से बचने की अपील के बाद बढ़ी बेचैनी, क्या शादी सीजन से पहले मुश्किल में पड़ जाएगा कारोबार?
नितिन गडकरी के मंत्रालय को लेकर क्यों उठे सवाल
नितिन गडकरी को लेकर भी सियासी चर्चाएं गर्म हैं। हालांकि उनके कैबिनेट से बाहर होने की बात सामने नहीं आई है, लेकिन उनके मंत्रालय में बदलाव की संभावना पर चर्चा हो रही है। ई-20 पेट्रोल और परिवहन से जुड़े मुद्दों पर हालिया बहस के बीच सरकार की रणनीति में बदलाव की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। ऐसे में गडकरी की मौजूदा जिम्मेदारी को लेकर फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
15 से 17 नए चेहरों की एंट्री का दावा
सबसे बड़ा संकेत नए चेहरों की संभावित एंट्री को लेकर है। चर्चाओं में 15 से 17 नए मंत्रियों को जगह दिए जाने की बात कही जा रही है। इनमें युवा, महिलाएं और चुनावी राज्यों से आने वाले नेताओं को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना पर भी नजर है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों के आगामी चुनावों को देखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे। विपक्ष की नजर इस बात पर टिकी है कि मोदी सरकार इस संभावित फेरबदल के जरिए जनता और चुनावी राज्यों को क्या संदेश देती है।