प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील करके नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव को देखते हुए लोगों को फिलहाल सोने की खरीद टालनी चाहिए। खासतौर पर शादी और बड़े आयोजनों में होने वाली भारी खरीदारी को सीमित करने की सलाह दी गई है। पीएम मोदी की इस अपील के बाद अब भारत के गोल्ड रिजर्व और दुनिया के बड़े स्वर्ण भंडार वाले देशों की चर्चा तेज हो गई है।
अमेरिका सबसे आगे
दुनिया में सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व रखने वाला देश अमेरिका है। आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के पास करीब 8133 टन सोना मौजूद है। लंबे समय से अमेरिका इस सूची में पहले स्थान पर बना हुआ है। इसके बाद जर्मनी दूसरे नंबर पर आता है जिसके पास करीब 3351 टन गोल्ड रिजर्व है। इटली लगभग 2452 टन सोने के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है जबकि फ्रांस करीब 2437 टन गोल्ड रिजर्व के साथ चौथे नंबर पर मौजूद है।
रूस और चीन की ताकत
गोल्ड रिजर्व के मामले में रूस और चीन भी तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। रूस के पास करीब 2333 टन सोना है और वह दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड खरीदार देशों में शामिल माना जाता है। वहीं चीन करीब 2303 टन गोल्ड रिजर्व के साथ छठे स्थान पर मौजूद है। चीन दुनिया के सबसे बड़े सोना उत्पादक देशों में भी शामिल है और लगातार अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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भारत की मजबूत स्थिति
भारत भी दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व वाले देशों की सूची में शामिल है। भारत के पास करीब 880 टन सोना मौजूद है और इसी के साथ देश शीर्ष देशों की सूची में मजबूत स्थिति बनाए हुए है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार सोने की खरीद बढ़ाई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में भी शामिल है और हर साल सैकड़ों टन सोने का आयात किया जाता है। इसका बड़ा हिस्सा स्विट्जरलैंड से आता है।
क्यों बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण विदेशी मुद्रा पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और सोने की भारी खरीद विदेशी मुद्रा भंडार पर असर डालती है। यही वजह है कि सरकार लोगों से फिलहाल सोने की खरीद सीमित करने की अपील कर रही है ताकि आर्थिक संतुलन बनाए रखा जा सके और आयात बिल को नियंत्रित किया जा सके।
आगे क्या होगा
अब लोगों की नजर सरकार की अगली रणनीति और वैश्विक बाजार की स्थिति पर टिकी हुई है। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और खराब होते हैं तो सोने की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में सरकार विदेशी मुद्रा बचाने और आयात नियंत्रण के लिए और कदम उठा सकती है। फिलहाल पीएम मोदी की अपील ने देशभर में सोने की खरीद और गोल्ड रिजर्व को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।