Middle East tensions: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात और बढ़ते तनाव पर चर्चा की। हाल के दिनों में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच टकराव बढ़ने के बाद क्षेत्र की स्थिति को लेकर कई देशों में चिंता देखी जा रही है। बातचीत में दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया।
शांति और कूटनीति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ पश्चिम एशिया के हालात पर विस्तार से चर्चा की। दोनों नेताओं ने माना कि बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों की ओर लौटना जरूरी है। भारत और फ्रांस ने इस दिशा में सहयोग जारी रखने और शांति बहाल करने के प्रयासों को मजबूत करने की बात कही।
कई देशों से बातचीत
फ्रांस के राष्ट्रपति से बातचीत से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद कई अन्य देशों के नेताओं से भी संपर्क किया था। भारत की कोशिश है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद को बढ़ावा दिया जाए। भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में स्थिरता और शांति की वकालत करता रहा है।
Spoke with my friend President Emmanuel Macron today. We discussed our shared concerns over the evolving situation in West Asia and the need for a return to dialogue and diplomacy. We will continue to engage closely and coordinate efforts towards the early restoration of peace…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 5, 2026
ईरान पर हमले से शुरू हुआ तनाव
पश्चिम एशिया में हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आई। इसके बाद क्षेत्र के कई देशों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए गए, जिससे पूरे इलाके में टकराव और बढ़ गया।
घटना से बढ़ी चिंता
तनाव उस समय और बढ़ गया जब श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी नौसेना जहाज पर हमला हुआ। बताया गया कि जहाज पर कई लोग सवार थे और घटना के बाद राहत व बचाव अभियान चलाया गया। इस घटना को लेकर ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास बेहद जरूरी हो गए हैं, ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके।