
चीन के तियानजिन में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत के निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसका कारण भारत का रूसी तेल का आयात बताया जा रहा है। इस पृष्ठभूमि में मोदी-पुतिन वार्ता और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत-रूस साझेदारी सिद्धांतों पर आधारित है और यह बहुआयामी सहयोग में विकसित हुई है। पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने का यह एक अच्छा अवसर है। उन्होंने एससीओ को दक्षिण और पूर्वी देशों को जोड़ने वाला अहम मंच बताया।
भारत-रूस संबंधों की गहराई
इसके साथ ही पुतिन ने याद दिलाया कि 21 दिसंबर, 2025 को भारत-रूस संबंधों की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ की 15वीं वर्षगांठ होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में यह साझेदारी और ऊंचाई पर पहुंचेगी। पीएम मोदी ने भी इस रिश्ते की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि भारत और रूस कठिन परिस्थितियों में हमेशा साथ खड़े रहे हैं।
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PM मोदी ने पुतिन को दिया भारत आने का निमंत्रण
प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को दिसंबर में भारत आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीय इस 23वीं वार्षिक शिखर बैठक के लिए उनका इंतजार कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि रूस और भारत के बीच सहयोग न केवल दोनों देशों की जनता के लिए, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए भी अहम है।
यूक्रेन संकट पर चर्चा
वार्ता के दौरान यूक्रेन संकट का मुद्दा भी उठा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत शांति स्थापित करने के लिए सभी प्रयासों का स्वागत करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ेंगे और संघर्ष को समाप्त करने का कोई स्थायी रास्ता निकालेंगे। मोदी ने कहा कि “यह पूरी मानवता की पुकार है।”
इस मुलाकात ने एक बार फिर साफ कर दिया कि भारत और रूस के बीच गहरे और भरोसेमंद रिश्ते हैं। तियानजिन में हुई बातचीत से उम्मीद है कि आने वाले महीनों में दोनों देशों का सहयोग और भी व्यापक और मजबूत होगा।