राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति और विकास को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति को रोकने के लिए भीतर और बाहर कुछ ताकतें झूठे नैरेटिव तैयार कर रही हैं और गलत जानकारियां फैलाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे प्रयासों से सावधान रहने और अपने मूल्यों पर मजबूती से टिके रहने की अपील की।
महाराणा प्रताप जयंती कार्यक्रम में दिया बयान
महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज कुछ शक्तियां यह सुनिश्चित करने में लगी हैं कि भारत आगे न बढ़ सके। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि इन ताकतों के पास जनसंख्या, धन, सत्ता और संगठन जैसी क्षमताएं हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय समाज अपने संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों के बल पर आगे बढ़ सकता है।
महाराणा प्रताप के संघर्ष को बताया प्रेरणा
भागवत ने हल्दीघाटी के युद्ध और महाराणा प्रताप के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का इतिहास गुलामी का नहीं बल्कि संघर्ष और स्वाभिमान का इतिहास रहा है। उनके अनुसार महाराणा प्रताप ने व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
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दुनिया के लिए मजबूत भारत जरूरी
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत की उन्नति केवल देश के हित के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के कल्याण के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति केवल उसकी जनसंख्या या आर्थिक संसाधनों में नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों में छिपी हुई है।
विविधता में एकता का दिया संदेश
मोहन भागवत ने समाज में एकता और आपसी सम्मान को सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में अलग-अलग पहचान होना स्वाभाविक है, लेकिन राष्ट्र की प्रगति के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि एकता के लिए समानता नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, सद्भाव और सम्मान की भावना जरूरी होती है।
हल्दीघाटी के युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे विदेशी आक्रमणों के खिलाफ भारतीय समाज के लंबे संघर्ष का प्रतीक बताया और कहा कि भारत ने सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से कभी भी गुलामी को स्वीकार नहीं किया। उनके अनुसार देश को आगे ले जाने के लिए नागरिकों को अपने चरित्र, मूल्यों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहना होगा।