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Mohan Bhagwat on Sangh-BJP: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा और संघ के रिश्तों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि दोनों के बीच कभी मनभेद नहीं हो सकते। भागवत ने स्पष्ट किया कि भाजपा और संघ के बीच मतभेद किसी विषय पर हो सकते हैं, लेकिन दिलों में दूरी कभी नहीं आती। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारों से संघ का हमेशा समन्वय रहता है। संघ सिर्फ सलाह देता है और निर्णय लेना भाजपा का काम है। भागवत ने यहां तक कहा कि अगर फैसले हमें करने होते तो इतना समय नहीं लगता। हाल के दिनों में भाजपा और संघ के बीच तनाव की खबरें आई थीं, जिन पर यह बयान अहम माना जा रहा है।
संघ की भूमिका और ऐतिहासिक उदाहरण
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में संघ की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अतीत में संघ ने कई मौकों पर अलग-अलग दलों का सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के बाद जयप्रकाश नारायण ने परिवर्तन की आशा संघ से जताई थी। यहां तक कि कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी भी संघ के मंच पर पहुंचे थे। भागवत ने एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब राजीव गांधी NSUI के अध्यक्ष थे, तब नागपुर अधिवेशन में भोजन को लेकर विवाद हुआ था और संघ के स्वयंसेवकों ने मदद की थी।
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शिक्षा पर विचार और संस्कृत की भूमिका
संघ प्रमुख ने शिक्षा व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षा की सामाजिक मान्यताएं सभी संस्थानों में एक जैसी होनी चाहिए, चाहे वह मदरसा हो या मिशनरी स्कूल। मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए उन्होंने फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली का उदाहरण दिया, जहां आठवीं तक पढ़ाई मातृभाषा में होती है। भागवत ने कहा कि संस्कृत का सामान्य ज्ञान हर भारतीय को होना चाहिए, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे विरोध पैदा हो सकता है।