.jpg%3Falt%3Dmedia%26token%3Dcb592d0a-2b65-456d-b4ea-15d285977529&w=3840&q=75)
Bail to Arun Gawli: गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार (28 अगस्त) को सर्वोच्च अदालत ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी। गवली 2007 में शिवसेना (अविभाजित) पार्षद कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के मामले में दोषी पाए गए थे और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह 17 साल और तीन महीने से जेल में बंद हैं। अदालत ने उनकी लंबी कैद, बढ़ती उम्र और अपील के लंबित होने को देखते हुए जमानत का फैसला सुनाया। फिलहाल वह 76 वर्ष के हैं और फरवरी 2026 में मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की गई है।
अदालत का फैसला और कानूनी पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह ने कहा कि गवली की सजा बरकरार रखने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के 2019 के आदेश को चुनौती दी गई है, लेकिन अपील पर सुनवाई अभी लंबित है। अदालत ने उनकी उम्र और अब तक की कैद की अवधि को देखते हुए उन्हें निचली अदालत द्वारा तय की गई शर्तों के साथ जमानत दी है। मार्च 2007 में जामसांडेकर की उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गवली और अन्य को 2006 में गिरफ्तार किया गया था और अगस्त 2012 में सत्र अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी, साथ ही 17 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
यह भी पढ़ेंःSensation in Hardoi: हरदोई में सनसनी, युवती ने जबरदस्ती पर प्रेमी का प्राइवेट पार्ट काटा, हालत गंभीर
नेता से डॉन तक का सफर
दगड़ी चॉल से अपनी पहचान बनाने वाले अरुण गवली ने 2004 में अखिल भारतीय सेना नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई थी। वह 2004 से 2009 तक मुंबई की चिंचपोकली सीट से विधायक भी रहे। लेकिन राजनीतिक सफर के बीच उन पर गंभीर आरोप लगे और 2008 में उन्हें शिवसेना पार्षद की हत्या के मामले में दोषी पाया गया। गवली के जीवन और उनकी दगड़ी चॉल की कहानी पर 2017 में "डैडी" नामक फिल्म भी बनी, जिसमें अभिनेता अर्जुन रामपाल ने उनका किरदार निभाया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर गवली को सुर्खियों में ला दिया है।