Mohan Bhagwats Message: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने इंफाल से ऐसा संदेश दिया, जिसने मणिपुर के तनावग्रस्त माहौल में नई उम्मीद जगाई है। मई 2023 में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद यह उनका पहला मणिपुर दौरा था। उन्होंने जनजातीय नेताओं से मुलाकात की और राज्य की जमीनी स्थिति का आकलन किया। भागवत ने कहा कि सामाजिक एकता, आपसी सम्मान और भाईचारा ही भारत की स्थायी शक्ति हैं। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर और भगवान बुद्ध का उदाहरण देकर कहा कि स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व भारत की सदियों पुरानी मूल धारणाएं हैं, जो आज भी राष्ट्रीय एकता का आधार बन सकती हैं।
#WATCH | Imphal, Manipur: RSS Chief Mohan Bhagwat says, "Sangh has done its best over the last three years and continues to do what it can. Whether the government is aware or not, we are concerned. We are concerned about each and every part of Bharat. Our organisation is present… pic.twitter.com/FlpyW5BzSy
— ANI (@ANI) November 20, 2025
संघ राजनीति नहीं करता
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने स्पष्ट कहा कि RSS न राजनीति करता है और न किसी को नियंत्रित करने का प्रयास। संगठन का लक्ष्य केवल समाज को संगठित करना और कमजोर वर्गों की चिंता को प्राथमिकता देना है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परेशानियां पूरे राष्ट्र की समस्याएं हैं और उनका समाधान लोकतांत्रिक संवाद और संवैधानिक दायरे में ही संभव है। युवाओं से उन्होंने आग्रह किया कि भारत कोई नया राष्ट्र नहीं बल्कि सभ्यता और संस्कृति के लंबे अनुभवों का देश है। अच्छी परंपराएं, मजबूत परिवार और उच्च संस्कार ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं।
2047 पर बड़ा बयान
भागवत ने भारत की सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया आज उत्तरों के लिए भारत की ओर देखती है। यह विरासत मूलतः हिंदू विरासत कही जाती है, जिसे भारत की सांस्कृतिक पहचान भी कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सीमाएं समय के साथ बदलती रहती हैं—1947 से पहले भारत बड़ा था, और भविष्य में 2047 के बाद फिर बड़ा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग अपनी पहचान बनाए रखते हुए एक समान सोच अपनाएं तो बाहरी शांति जल्दी आ जाएगी, भले ही भीतर की शांति में समय लगे।