
Monsoon Rains: देश में इस साल मानसून ने सामान्य से आठ प्रतिशत ज्यादा बारिश दी है। सक्रिय मानसून और पश्चिमी विक्षोभों की वजह से कई राज्यों में भारी वर्षा दर्ज की गई, जिससे पंजाब और महाराष्ट्र जैसे इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 24 मई को केरल में दस्तक देने वाला मानसून 15 अक्टूबर को विदा हुआ, जो सामान्य तिथि से एक दिन बाद था। हालांकि इसके बाद भी देश के कई हिस्सों में बारिश जारी रही। इस साल भारत में चार महीने के मानसूनी सीजन में औसतन 937.2 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य 868.6 मिमी होती है।
उत्तर-पश्चिम में भारी बारिश
आईएमडी के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में इस साल बारिश सामान्य से 27 प्रतिशत अधिक हुई, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में वर्षा 20 प्रतिशत तक कम रही। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वी भारत में यह 1901 के बाद दूसरी सबसे कम बारिश दर्ज की गई। वहीं, पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड में लगातार बारिश से बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं, जिससे सड़कों, पुलों और घरों को नुकसान पहुंचा। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस अतिरिक्त बारिश का कारण लगातार सक्रिय मानसून और पश्चिमी विक्षोभों की संयुक्त भूमिका रही, जिसने बारिश को लंबा खींचा।
जल्दी आएगी ठंड
अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे उत्तर भारत में ठंड ने दस्तक दे दी है। इस बार सर्दी सामान्य से ज्यादा दिनों तक रहने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे रहेगा और यह सर्दी एक दशक की सबसे ठंडी साबित हो सकती है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात के चलते पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तमिलनाडु में 28 से 31 अक्टूबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दिसंबर तक देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा की उम्मीद है।