General Mohammad Ali Jafari: हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान ने मिडिल ईस्ट की स्थिति को काफी तनावपूर्ण बना दिया है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस अभियान के बाद कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आईं। इसके बावजूद ईरान ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी है और क्षेत्र में अपनी सैन्य सक्रियता बनाए रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की इस क्षमता के पीछे पूर्व आईआरजीसी कमांडर Mohammad Ali Jafari की रणनीतिक सोच अहम भूमिका निभा रही है।
नई रणनीति की नींव
विश्लेषकों के अनुसार जनरल जाफरी ने 2003 में हुए Iraq War का गहराई से अध्ययन किया था। उस युद्ध में इराक की सेना की सबसे बड़ी कमजोरी अत्यधिक केंद्रीकृत कमान प्रणाली थी, जहां सभी निर्णय शीर्ष नेतृत्व पर निर्भर थे। इसी अनुभव से सीख लेते हुए जाफरी ने ईरान की सैन्य संरचना को अधिक लचीला और विकेंद्रीकृत बनाने की दिशा में काम शुरू किया।
कैसे करता है काम
जाफरी द्वारा विकसित “मोजेक डिफेंस सिस्टम” में सेना को कई छोटे और अर्ध-स्वायत्त कमांड क्षेत्रों में बांटा गया। देश के विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग मुख्यालय, संचार नेटवर्क, मिसाइल और ड्रोन भंडार स्थापित किए गए। इस प्रणाली के तहत यदि केंद्रीय कमान से संपर्क टूट भी जाए, तो स्थानीय इकाइयां पहले से तय योजना के अनुसार स्वतंत्र रूप से सैन्य कार्रवाई जारी रख सकती हैं।
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लंबा युद्ध बनाना लक्ष्य
ईरान की पर्वतीय भौगोलिक स्थिति और बड़े आंतरिक क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए यह रणनीति तैयार की गई। इसका उद्देश्य किसी भी बाहरी सेना को लंबे और जटिल युद्ध में उलझाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मॉडल के कारण स्थानीय कमांडर स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम रहते हैं और सैन्य गतिविधियां लगातार जारी रहती हैं।
रणनीति बनी मजबूत ढाल
हालांकि अमेरिका और इजरायल सैन्य तकनीक और हथियारों के मामले में काफी आगे माने जाते हैं, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की यह विकेंद्रीकृत रक्षा प्रणाली उनके लिए चुनौती बन रही है। कई सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग दो दशक पहले तैयार की गई यह रणनीति आज भी ईरान की रक्षा संरचना को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही है।