राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में ठंड ने इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लगातार दूसरे दिन न्यूनतम तापमान माइनस 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इतनी तेज ठंड से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। रात के समय लोगों को भारी रजाइयों के साथ रूम हीटर का सहारा लेना पड़ा। सुबह होते ही ठंड का असर इतना ज्यादा रहा कि लोग देर तक घरों में दुबके रहे।
सुबह तक जमी बर्फ की परत
सुबह खुले मैदानों, बाग-बगीचों, घास, पेड़-पौधों और वाहनों की छतों पर बर्फ की पतली परत जमी हुई नजर आई। सोलर प्लेटों और फूलों पर जमी बर्फ ने पूरे शहर को बर्फिस्तान जैसा नजारा दे दिया। कोहरा छाया रहा, जो सूरज निकलने के बाद धीरे-धीरे साफ हुआ। इसके बाद लोगों ने धूप का सहारा लेकर ठंड से राहत पाने की कोशिश की।
दिन में धूप, शाम होते ही सन्नाटा
दिन के समय आसमान साफ रहने से लोगों ने छतों और सड़कों के किनारे धूप का आनंद लिया। हालांकि अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई और पारा 23 डिग्री सेल्सियस तक ही पहुंच सका। दोपहर बाद हवा चलने से ठंड का असर फिर बढ़ गया। शाम ढलते ही शीतलहर चलने लगी और लोग जल्दी ही घरों और होटलों में सिमट गए।
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कारोबार और दिनचर्या पर असर
भीषण सर्दी का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी साफ दिखा। सुबह व्यापारिक प्रतिष्ठान देर से खुले। ठंड के कारण लोग जरूरी काम से बाहर निकलने से बचते नजर आए। शहर में जगह-जगह लोग अलाव तापते दिखाई दिए। चाय की दुकानों पर भीड़ रही, जहां लोग गर्म चाय की चुस्कियों के साथ ठंड से राहत ढूंढते नजर आए।
ग्रामीणों को झेलनी पड़ी परेशानी
कड़ाके की सर्दी ने आसपास के गांवों के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दीं। उतरज, शेरगांव और अनादरा जैसे गांवों से सब्जियां और दूध शहर तक पहुंचाने में लोगों को भारी दिक्कत हुई। सुबह वाहन स्टार्ट नहीं हो रहे थे, कई लोग गाड़ियों को धक्का लगाकर चालू करते नजर आए। ठंड के कारण सड़क पर आवाजाही भी कम रही।
बढ़ी बीमारियों की संख्या
तेज ठंड का असर स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां लोगों को अपनी बारी के लिए कतार में इंतजार करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।