कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार लॉन्ग जंप खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। पुरुष लंबी कूद स्पर्धा में उन्होंने 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाई और लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने का कारनामा किया।
गणित के छात्र, मैदान के चैंपियन
मुरली श्रीशंकर सिर्फ मैदान पर ही नहीं, पढ़ाई में भी शानदार रहे हैं। उन्होंने केरल के पलक्कड़ स्थित गवर्नमेंट विक्टोरिया कॉलेज से गणित में बीएससी की डिग्री हासिल की है। खेल के साथ शिक्षा को भी बराबर महत्व देने वाले श्रीशंकर की यह उपलब्धि उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग पहचान दिलाती है।
खेल विरासत में मिला
27 मार्च 1999 को जन्मे मुरली श्रीशंकर का खेल से रिश्ता बचपन से ही रहा है। उनके पिता एस. मुरली भारत के पूर्व ट्रिपल जंप खिलाड़ी रहे हैं और उन्होंने दक्षिण एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। वहीं उनकी मां के.एस. बिजीमोल 800 मीटर की धाविका रही हैं और 1992 एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीत चुकी हैं।
दौड़ से शुरू हुआ था सफर
मुरली श्रीशंकर ने अपने खेल करियर की शुरुआत 50 और 100 मीटर दौड़ से की थी। कम उम्र में वह राज्य स्तर पर चैंपियन भी रहे। लेकिन 13 वर्ष की उम्र में पिता के मार्गदर्शन में उन्होंने लंबी कूद को अपना मुख्य इवेंट बनाया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
भारतीय एथलेटिक्स का बड़ा नाम
श्रीशंकर विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई करने वाले भारत के पहले लॉन्ग जंपर हैं। अब वह कॉमनवेल्थ गेम्स में दो रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय लॉन्ग जंप खिलाड़ी भी बन गए हैं। उनकी लगातार सफलता ने भारतीय एथलेटिक्स में लंबी कूद को नई पहचान दिलाई है।
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ओलंपिक की ओर बढ़ते कदम
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में एक और पदक जीतने के बाद मुरली श्रीशंकर का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है। अब उनकी नजर आने वाली विश्व प्रतियोगिताओं और ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने पर होगी। भारतीय खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में श्रीशंकर देश को और बड़ी सफलताएं दिलाएंगे।