टेक दुनिया के दिग्गज एलन मस्क ने ओपनएआई और उसके सह-संस्थापकों सैम ऑल्टमैन व ग्रेग ब्रॉकमैन के खिलाफ लगाए गए धोखाधड़ी के आरोप वापस ले लिए हैं। हालांकि उन्होंने केस खत्म नहीं किया, बल्कि अब इसे नई दिशा देते हुए ‘अनुचित लाभ’ और ‘चैरिटेबल ट्रस्ट के उल्लंघन’ पर फोकस कर दिया है। इस बदलाव को कानूनी रणनीति का बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारी भरकम हर्जाने की मांग
मस्क ने इस मामले में करीब 134 अरब डॉलर यानी लगभग 12.33 लाख करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर वे केस जीतते हैं तो यह रकम कंपनी की चैरिटेबल शाखा को दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट से यह भी मांग की है कि ओपनएआई को फिर से गैर-लाभकारी संस्था बनाया जाए और मौजूदा नेतृत्व को हटाया जाए।
मामले की जड़ में क्या विवाद
मस्क का आरोप है कि ओपनएआई ने अपने मूल उद्देश्य से हटकर काम किया है। उनका कहना है कि कंपनी की शुरुआत एक गैर-लाभकारी संस्था के तौर पर हुई थी, लेकिन बाद में माइक्रोसॉफ्ट से अरबों डॉलर की फंडिंग लेने के बाद यह मुनाफा कमाने वाली संस्था में बदल गई। वहीं ओपनएआई और उसके सहयोगियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि मस्क लगातार नई मांगें जोड़कर मामले को जटिल बना रहे हैं।
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कोर्ट की अनुमति और ट्रायल प्रक्रिया
कैलिफोर्निया की फेडरल अदालत की जज यवोन गोंजालेज रोजर्स ने मस्क को अपने आरोप सीमित करने की अनुमति दे दी है। यह मामला नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जिसमें पहले 26 अलग-अलग आरोप शामिल थे, लेकिन अब केवल दो प्रमुख बिंदु ही बचे हैं। ओकलैंड स्थित कोर्ट में जूरी चयन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिससे यह मामला अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।
दो चरणों में होगा फैसला
इस केस की सुनवाई दो चरणों में होगी। पहले चरण में जूरी दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी और एक सलाहकारी फैसला देगी, जो बाध्यकारी नहीं होगा। दूसरे चरण में जज अंतिम निर्णय लेंगे कि मस्क की मांगों पर क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
टेक इंडस्ट्री पर असर
इस पूरे विवाद का असर केवल इन कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंडस्ट्री के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है। अगर कोर्ट मस्क के पक्ष में फैसला देता है, तो इससे टेक कंपनियों के बिजनेस मॉडल और निवेश संरचना पर बड़ा असर पड़ सकता है।