बांग्लादेश क्रिकेट इन दिनों भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है और इसकी जड़ में हैं मुस्तफिजुर रहमान। जिस गेंदबाज ने अपनी कटर से दुनिया के बड़े बल्लेबाजों को परेशान किया, उसी के नाम पर अब बांग्लादेशी खिलाड़ियों की नींद उड़ गई है। ड्रेसिंग रूम में बेचैनी है, खिलाड़ी कैमरों के सामने खुलकर चिंता जता रहे हैं और हर कोई यही सवाल कर रहा है कि आखिर यह विवाद कहां जाकर रुकेगा। बोर्ड के फैसलों का असर अब सीधे खिलाड़ियों के मनोबल पर दिखने लगा है।
आईपीएल को लेकर फैली अफवाहों ने बढ़ाया भ्रम
मुस्तफिजुर रहमान के आईपीएल भविष्य को लेकर बांग्लादेशी मीडिया में कई तरह की खबरें सामने आईं। दावा किया गया कि बीसीसीआई ने उन्हें दोबारा खेलने की इजाजत दे दी है। लेकिन जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष आसिफ अकबर से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। इस विरोधाभास ने खिलाड़ियों को और उलझन में डाल दिया। बाद में यह भी साफ हुआ कि मुस्तफिजुर पहले ही आईपीएल से बाहर हो चुके हैं और उन्होंने दूसरी लीग में नाम दर्ज कराया है।
बीसीबी और बीसीसीआई के टकराव का असर खिलाड़ियों पर
मुस्तफिजुर के फैसले के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और भारतीय बोर्ड के रिश्तों में तल्खी बढ़ गई। बीसीबी ने इसे सम्मान और सुरक्षा से जोड़कर देखा, जबकि बीसीसीआई ने नियमों का हवाला दिया। इस टकराव की कीमत अब खिलाड़ी चुका रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेशी क्रिकेटरों के बीच असुरक्षा की भावना तेजी से बढ़ी है और उन्हें डर है कि बोर्ड की लड़ाई में उनका करियर फंस सकता है।
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करार टूटने से खिलाड़ियों की बढ़ी चिंता
इस पूरे विवाद के बीच कुछ बांग्लादेशी खिलाड़ियों के निजी करार भी प्रभावित हुए हैं। भारतीय खेल कंपनियों ने लिट्टन दास जैसे खिलाड़ियों के साथ समझौते खत्म कर दिए। इससे खिलाड़ियों के मन में यह डर बैठ गया है कि राजनीति और बोर्ड के फैसले उनके पेशेवर भविष्य पर भारी पड़ सकते हैं। एक अधिकारी ने माना कि इन घटनाओं ने खिलाड़ियों को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है।
टी20 वर्ल्ड कप से पहले आईसीसी को पत्र
टी20 वर्ल्ड कप नजदीक आने के साथ ही बीसीबी की चिंता और बढ़ गई है। बोर्ड ने सुरक्षा का हवाला देते हुए आईसीसी को पत्र भेजकर अपने मैचों के आयोजन को लेकर आपत्ति जताई है। हालांकि आईसीसी ने अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इससे खिलाड़ियों की तैयारी भी प्रभावित हो रही है और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
बोर्ड के भीतर मतभेद और आगे की राह
इस पूरे मामले में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अंदर भी एक राय नहीं है। कुछ सदस्य मानते हैं कि टकराव की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए, ताकि नुकसान खिलाड़ियों को न झेलना पड़े। वहीं कुछ लोग सख्त रुख के पक्ष में हैं। फिलहाल हर नजर आईसीसी के फैसले पर टिकी है। इतना तय है कि मुस्तफिजुर रहमान से जुड़ा यह विवाद अब बांग्लादेश क्रिकेट के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है और इसका असर लंबे समय तक दिख सकता है।