Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के अकबर नगर क्षेत्र से जुड़े 91 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के मामले में जिला चुनाव अधिकारी को जांच के निर्देश दिए हैं। याचिका सना परवीन समेत अन्य निवासियों की ओर से दायर की गई थी, जिनका दावा है कि सितंबर 2023 में उनके घर गिराए जाने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
कोर्ट की टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने शुरुआत में कहा कि निवास से जुड़े विवादित तथ्यों की जांच रिट याचिका के तहत सीमित हो सकती है। हालांकि, अदालत ने शिकायतों को गंभीर मानते हुए जिला चुनाव अधिकारी को तथ्यों की जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि स्थानीय स्तर पर राहत नहीं मिलती है तो याचिकाकर्ता अन्य कानूनी विकल्प अपना सकते हैं।
अधिकार का सवाल
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे वर्षों से अकबर नगर में रह रहे थे और 2002 से उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज थे। उनका आरोप है कि घरों के ध्वस्तीकरण और पुनर्वास प्रक्रिया के बाद स्थायी पता न होने के आधार पर उनके नाम सूची से हटा दिए गए। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए और आवश्यक प्रपत्र जमा कराने की अनुमति दी जाए।
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जिला चुनाव अधिकारी को निर्देश
अदालत ने लखनऊ के जिला चुनाव अधिकारी को यह जांचने को कहा कि संबंधित लोगों के नाम पहले मतदाता सूची में थे या नहीं, और वर्तमान स्थिति क्या है। जांच के आधार पर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कहा गया कि जरूरत पड़ने पर वे इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
आगे की कानूनी राह
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान उन्हें विशेष सूची में शामिल किया गया था। अदालत ने तथ्यों के सत्यापन पर जोर देते हुए कहा कि पहले प्रशासनिक स्तर पर जांच पूरी होनी चाहिए। अब निगाहें जिला प्रशासन की रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।