संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा ने हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल को मंजूरी दे दी। इसके कानून बनने के बाद सिगरेट, पान मसाला जैसे हानिकारक उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि इस टैक्स से जुटाई गई रकम सीधे देश की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में लगाई जाएगी। दो दिन चली बहस के बाद यह बिल पास हो गया, जिससे ऐसे उत्पादों की कीमत बढ़ने तय है। सरकार का कहना है कि आम लोगों पर बोझ न डाले बिना सुरक्षा के लिए आवश्यक फंड जुटाने का यह सबसे बेहतर तरीका है।
क्यों जरूरी पड़ा नया सेस ?
सीतारमण ने चर्चा के दौरान बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान बजट की कमी के कारण सेना के पास सिर्फ 70 से 80 प्रतिशत हथियार और गोला-बारूद था। यह स्थिति दोबारा न दोहराई जाए, इसलिए यह सेस लाया गया है। आज आधुनिक युद्धों में प्रिसिजन वेपन्स, स्पेस टेक्नोलॉजी और साइबर ऑपरेशन बेहद महंगे हो चुके हैं। ऐसे में देश की सुरक्षा क्षमता को मजबूत रखने के लिए स्थायी फंडिंग जरूरी है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह सेस किसी आवश्यक वस्तु पर नहीं बल्कि उन्हीं चीजों पर लगाया जाएगा जो लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे जनता पर आर्थिक दबाव भी नहीं पड़ेगा।
हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में भी होगा बड़ा सुधार
सरकार का कहना है कि यह सेस सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि पब्लिक हेल्थ सिस्टम को भी मजबूत करेगा। मंत्रालय का लक्ष्य है कि लोगों की बीमारी से जुड़ी जोखिमों को कम किया जाए और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर किया जाए। पान मसाला और सिगरेट महंगे होने से इनकी खपत भी घटेगी, जिससे समाज को लंबे समय में बड़ा फायदा मिलेगा। वित्त मंत्री ने साफ कहा कि अवगुण वाले उत्पाद सस्ते नहीं हो सकते, क्योंकि ये नुकसान पहुंचाते हैं और इनके जरिए मिलने वाला राजस्व ही देश के हित में उपयोग किया जाएगा।
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विपक्ष की आपत्ति, सरकार ने दी सफाई
बिल पर चर्चा के दौरान कई विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने पान मसाला और गुटखा के विज्ञापनों को लेकर सरकार से सवाल पूछा। कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने भी कुछ क्लॉज पर आपत्ति जताई। लेकिन वित्त मंत्री ने साफ बताया कि यह सेस पूरी तरह संसद के अधिकार में रहेगा और हर खर्च पारदर्शिता के साथ होगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में आधुनिक टेक्नोलॉजी की जरूरत पड़ी और भविष्य में भी पड़ती रहेगी, इसलिए फंड जुटाना जरूरी है। सरकार का दावा है कि यह टैक्स देश की सुरक्षा और नागरिकों की सेहत—दोनों को मजबूत करेगा।