मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली के भारत मंडपम में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में NDA के सभी प्रमुख सहयोगी दल शामिल हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश से अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल, सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर, निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी को आमंत्रित किया गया है। ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि जयंत चौधरी ने अपने अन्य कार्यक्रम रद्द कर इस आयोजन को प्राथमिकता दी है।
यूपी चुनाव से पहले क्यों बढ़ी अहमियत
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं। ऐसे समय में NDA के सहयोगी दलों का एक मंच पर दिखाई देना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से सीट बंटवारे और सहयोगी दलों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। ऐसे माहौल में दिल्ली का यह आयोजन गठबंधन की मजबूती दिखाने का प्रयास माना जा रहा है।
राजभर और निषाद ने गिनाईं उपलब्धियां
सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए ऐतिहासिक काम किए हैं। वहीं संजय निषाद ने दावा किया कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा है। दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को देश की वैश्विक पहचान मजबूत करने वाला बताया।
विपक्ष को भी दिया जा रहा संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कार्यक्रम सिर्फ सरकार की उपलब्धियों का जश्न नहीं है, बल्कि विपक्ष को राजनीतिक संदेश देने की रणनीति भी है। एक तरफ INDIA गठबंधन लगातार एकजुटता की बात कर रहा है, वहीं NDA अपने सहयोगियों के साथ सार्वजनिक रूप से ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है। इससे यह संदेश देने का प्रयास है कि गठबंधन पूरी तरह मजबूत और सक्रिय है।
सीट बंटवारे की चर्चाओं पर विराम?
बीते दिनों सहयोगी दलों की ओर से सीटों की संख्या और हिस्सेदारी को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं। ऐसे में सभी प्रमुख नेताओं का एक साथ मंच साझा करना इन चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश माना जा रहा है। भाजपा यह दिखाना चाहती है कि चुनाव से पहले गठबंधन में किसी तरह की दरार नहीं है और सभी दल साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
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2027 की तैयारी का संकेत
विश्लेषकों के मुताबिक दिल्ली का यह आयोजन आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों का शुरुआती संकेत भी है। NDA नेतृत्व चाहता है कि चुनाव से पहले सहयोगी दलों के बीच भरोसा बना रहे और कार्यकर्ताओं तक एकजुटता का संदेश पहुंचे। इसलिए यह कार्यक्रम सिर्फ 12 साल के जश्न तक सीमित नहीं है, बल्कि 2027 की राजनीतिक लड़ाई की भूमिका भी माना जा रहा है।