वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी उछाल का असर अब भारत की तेल कंपनियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने बड़ा खुलासा किया है। सरकार के अनुसार मौजूदा कीमतों पर ईंधन बेचने के बावजूद सरकारी तेल विपणन कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे आने वाले समय में ईंधन कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
डीजल और पेट्रोल पर हो रहा भारी नुकसान
पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सरकारी तेल कंपनियों को डीजल की बिक्री पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं पेट्रोल पर यह घाटा लगभग 6 रुपये प्रति लीटर बताया गया है। इसके अलावा घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर भी कंपनियों को प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। मंत्रालय के अनुसार इन सभी मदों को मिलाकर कंपनियों का दैनिक घाटा 600 से 700 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है।
ऊर्जा संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। वैश्विक समुद्री मार्गों पर बढ़ी अनिश्चितता और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का सीधा असर आयातक देशों पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हर उछाल का असर घरेलू बाजार और तेल कंपनियों की लागत पर दिखाई देता है।
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एलपीजी कीमतों में पहले ही हो चुकी है बढ़ोतरी
हाल के दिनों में घरेलू रसोई गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल कंपनियों ने पहले ही एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच कंपनियों को संतुलन बनाए रखने में कठिनाई हो रही है।
आगे क्या हो सकते हैं संकेत?
सरकार ने फिलहाल किसी नई मूल्य वृद्धि की घोषणा नहीं की है, लेकिन तेल कंपनियों के लगातार बढ़ते घाटे ने बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और आयात लागत में कमी नहीं आती है, तो आने वाले समय में ईंधन कीमतों को लेकर दबाव बना रह सकता है। फिलहाल उपभोक्ताओं और बाजार दोनों की नजर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की दिशा और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।