Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा की शिक्षाओं में अमीरी का मतलब सिर्फ खूब पैसा, बड़ा घर या बैंक में मोटी रकम होना नहीं है। आमतौर पर हम किसी की हैसियत उसकी गाड़ी, घर और महंगी चीजों से आंकते हैं, लेकिन असली संपन्नता इससे कहीं आगे की चीज है। इंसान कितना कमाता है, यह जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि वह अपनी कमाई और जिंदगी का इस्तेमाल किस तरह करता है। कई बार ऐसा होता है कि इंसान के पास जरूरत की हर सुख-सुविधा होती है, फिर भी उसके मन में बेचैनी और खालीपन बना रहता है। वहीं कुछ लोग कम साधनों में भी संतुष्ट और खुश नजर आते हैं। नीम करोली बाबा की सीख इसी फर्क को समझने पर जोर देती है। उनके विचारों के अनुसार, सच्ची अमीरी उस व्यक्ति की है, जिसके पास धन के साथ संतोष, अच्छे संस्कार और दूसरों के लिए कुछ करने का भाव भी हो।
पैसा हो, लेकिन उसका मकसद भी समझें
धन कमाना जरूरी है, क्योंकि इससे परिवार की जरूरतें पूरी होती हैं और भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है। लेकिन पैसे को केवल जमा करते जाना ही जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। जरूरतों पर खर्च करने के साथ धन का इस्तेमाल ऐसे कामों में भी किया जा सकता है, जिनसे परिवार या किसी दूसरे व्यक्ति को फायदा मिले। अगर आपकी कमाई किसी जरूरतमंद के काम आती है या किसी की परेशानी थोड़ी कम कर देती है, तो उस धन की उपयोगिता और बढ़ जाती है।
दूसरों के लिए मदद का हाथ बढ़ाना
किसी की सहायता करने के लिए बहुत बड़ा दान देना जरूरी नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार की गई छोटी-सी मदद भी किसी के लिए बहुत मायने रख सकती है। किसी भूखे को भोजन देना, जरूरतमंद बच्चे की पढ़ाई में सहयोग करना या किसी मुश्किल परिस्थिति में किसी का साथ देना भी इंसानियत की बड़ी मिसाल है। मदद का असली मूल्य रकम से नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपी भावना से तय होता है।
अच्छा व्यवहार भी है बड़ी दौलत
अगर किसी व्यक्ति के पास अपार संपत्ति है, लेकिन वह दूसरों के साथ सम्मान से पेश नहीं आता। ऐसे में केवल पैसा उसे वास्तव में समृद्ध नहीं बना सकता। इंसान का व्यवहार, संवेदनशीलता और उसके संस्कार उसकी असली पहचान बनाते हैं। धन आज है और कल कम भी हो सकता है, लेकिन किसी के साथ अच्छे व्यवहार से बनी छवि लंबे समय तक याद रहती है।
कमाई का तरीका भी रखता है मायने
सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किसी व्यक्ति के पास कितना पैसा है। यह भी महत्वपूर्ण है कि उसने वह पैसा किस रास्ते से कमाया है। गलत तरीके से अर्जित धन भले ही बाहर से संपन्नता दिखाए, लेकिन उससे मन को वह संतोष नहीं मिल सकता जो मेहनत और ईमानदारी से हासिल की गई कमाई देती है। ईमानदार मेहनत से कमाया गया धन व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और आत्मसम्मान पैदा करता है।
हर पैसा बचाना समझदारी नहीं
भविष्य के लिए बचत करना अच्छी आदत है, लेकिन धन को सिर्फ तिजोरी या खाते में बढ़ाते रहना ही समझदारी नहीं कही जा सकती। पैसा ऐसी चीज है जिसका सही समय पर सही जगह इस्तेमाल होना जरूरी है। परिवार की जरूरत, किसी जरूरी काम या किसी जरूरतमंद की सहायता में लगाया गया धन अपनी सार्थकता साबित करता है। इसलिए बचत के साथ खर्च और मदद के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।