Nepal prints Indian territory: नेपाल और भारत के बीच वर्षों से चल रहा सीमा विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। नेपाल के केंद्रीय बैंक ने नया 100 रुपये का नोट जारी किया है, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपने नक्शे में शामिल दिखाया गया है। ये तीनों इलाके भारत के उत्तराखंड राज्य में आते हैं, जिन पर नेपाल दावा करता रहा है। भारत पहले ही साफ कर चुका है कि ये क्षेत्र उसके ही हिस्से हैं और नेपाल का जमाई सीमा दावा न तो ऐतिहासिक है और न ही स्वीकार्य। पांच साल पहले नेपाल ने अपने राजनीतिक मानचित्र में संशोधन कर इन क्षेत्रों को जोड़ लिया था, और अब करेंसी नोट पर इन्हें छापने से विवाद और गहरा हो गया है।
क्या है करेंसी पर नक्शा छापने का नियम
किसी देश की करेंसी पर नक्शा छापने के लिए कोई वैश्विक नियम मौजूद नहीं है। यह निर्णय उस देश की सरकार और उसके केंद्रीय बैंक की नीतियों पर निर्भर करता है। किसी स्थान को राष्ट्रीय प्रतीक, सांस्कृतिक प्रतीक या महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र के तौर पर दिखाने का पूरा अधिकार देश की शासन व्यवस्था के पास होता है। कई बार देश अपने दावों को मजबूत दिखाने के लिए भी नक्शों को करेंसी में शामिल करते हैं। नेपाल के मामले में भी यह कदम राजनीतिक संदेश देने जैसा माना जा रहा है।
भारत के पास क्या विकल्प हैं
भारत पहले ही नेपाल के संशोधित नक्शे को “एकतरफा कदम” बताते हुए खारिज कर चुका है। ऐसे में भारत सबसे पहले नेपाल सरकार से औपचारिक आपत्ति दर्ज कर सकता है और इस निर्णय को वापस लेने की मांग कर सकता है। यदि नेपाल इस पर कोई कार्रवाई नहीं करता, तो भारत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाकर कूटनीतिक दबाव बना सकता है। इसके अलावा, द्विपक्षीय वार्ता के जरिए भी भारत स्पष्ट कर सकता है कि सीमा से छेड़छाड़ किसी भी तरह स्वीकार नहीं की जाएगी। कूटनीतिक स्तर पर भारत के पास विरोध दर्ज कराने से लेकर सीमाई समितियों के माध्यम से आपत्ति जताने तक कई विकल्प मौजूद हैं।