न्यू लेबर कोड लागू होने के साथ कर्मचारियों की सैलरी का ढांचा पूरी तरह बदल गया है. अब कंपनियों को कर्मचारियों की बेसिक सैलरी को कुल CTC के कम से कम 50% पर रखना होगा. पहले कई कंपनियां बेसिक को 30–35% तक सीमित रखती थीं जिससे PF और NPS जैसे रिटायरमेंट फंड में जमा होने वाली रकम कम रहती थी. नए नियम में इन-हैंड सैलरी जरूर घटेगी, लेकिन लंबे समय में फायदा कई गुना अधिक मिलेगा. क्योंकि PF, ग्रेच्युटी और NPS जैसे फंड तेजी से बढ़ेंगे और रिटायरमेंट के समय बड़ा कॉर्पस तैयार होगा.
इन-हैंड सैलरी क्यों घटेगी?
नए नियम के तहत बेसिक सैलरी बढ़ने के साथ PF और NPS का योगदान भी बढ़ जाएगा. उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की CTC 12 लाख रुपये सालाना है, तो पहले उसका PF (कर्मचारी + नियोक्ता) करीब 7,200 रुपये महीना कटता था. लेकिन अब बेसिक 50% होने पर PF 12,000 रुपये महीने कटेगा. यानी हर महीने लगभग 4,800 रुपये की अतिरिक्त कटौती होगी. इसी तरह NPS और ग्रेच्युटी में भी वृद्धि होगी. नतीजा यह होगा कि हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम लगेगी, लेकिन रिटायरमेंट फंड तेजी से बढ़ता रहेगा. यही कारण है कि शुरुआत में थोड़ी दिक्कत महसूस होगी, लेकिन उम्र बढ़ने पर यह फैसला लाभदायक साबित होगा.
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35 साल बाद मिलेगा करोड़ों का रिटर्न
सैलरी स्ट्रक्चर के इस बदलाव से रिटायरमेंट की तैयारी और मजबूत हो जाएगी. पुराने नियम में जहां PF और NPS मिलाकर किसी कर्मचारी को करीब 3.46 करोड़ रुपये मिलते थे, वहीं नए लेबर कोड में यही राशि बढ़कर लगभग 5.77 करोड़ रुपये हो जाएगी. यानी करीब 2.31 करोड़ रुपये का बड़ा फायदा. PF कॉर्पस 1.87 करोड़ से बढ़कर 3.11 करोड़ और NPS कॉर्पस 1.59 करोड़ से बढ़कर 2.66 करोड़ तक पहुंच सकता है. अगर आपकी उम्र 25–30 साल के बीच है और सैलरी करीब 1 लाख रुपये महीने है, तो नए नियम के तहत रिटायरमेंट पर लगभग 5.77 करोड़ रुपये का सुरक्षा फंड तैयार हो सकता है.
लंबी अवधि के फायदे ज्यादा मजबूत
नए लेबर कोड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कर्मचारियों की बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाता है. बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और NPS में अनिवार्य बचत बढ़ेगी, जो समय के साथ कंपाउंड होकर बड़ा फंड तैयार करेगी. हालांकि शुरुआत में EMI, घर का किराया, फीस और अन्य खर्चों के बीच सैलरी कम लग सकती है, लेकिन यह असुविधा अस्थायी है. लंबे समय में कर्मचारियों का रिटायरमेंट फंड पहले से कहीं ज्यादा बड़ा हो जाएगा. यही वजह है कि नए लेबर कोड को भविष्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है.