केंद्र सरकार ने देश की श्रम व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं। लंबे समय से इन नियमों का इंतजार किया जा रहा था और अब आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद ये पूरी तरह प्रभावी हो चुके हैं। नए नियमों में वेज कोड 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020 शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे देश की पुरानी और जटिल श्रम व्यवस्था को आसान बनाया जाएगा।
29 पुराने कानून हुए खत्म
नए लेबर कोड लागू होने के साथ ही 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर दिया गया है। सरकार के मुताबिक पुराने नियम समय के साथ काफी जटिल हो चुके थे, जिससे कर्मचारियों और कंपनियों दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब एकीकृत व्यवस्था के जरिए श्रम कानूनों को ज्यादा पारदर्शी और सरल बनाया गया है। सरकार का दावा है कि इससे कारोबार करना आसान होगा और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही कर्मचारियों के अधिकारों को भी ज्यादा मजबूती मिलेगी।
48 घंटे काम का नया नियम
नए नियमों के तहत अब किसी भी कर्मचारी से हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे ही काम लिया जा सकेगा। अगर कोई कर्मचारी तय समय से ज्यादा काम करता है, तो उसे ओवरटाइम का पूरा भुगतान करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा हर कर्मचारी को सप्ताह में कम से कम एक दिन की छुट्टी देना जरूरी किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव कम होगा और कामकाज का संतुलन बेहतर बनेगा। कंपनियों को भी अब काम के घंटे और ओवरटाइम को लेकर स्पष्ट नियमों का पालन करना होगा।
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जॉब लेटर और हेल्थ सुविधा
नए लेबर कोड में कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब हर कर्मचारी को नौकरी जॉइन करते समय लिखित नियुक्ति पत्र देना जरूरी होगा। इससे नौकरी से जुड़े विवाद कम करने में मदद मिलेगी। वहीं 40 साल या उससे ज्यादा उम्र के कर्मचारियों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी लागू की गई है। सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा और कार्यस्थल का माहौल बेहतर बनेगा।
महिलाओं और बेरोजगारों को राहत
नए नियमों में महिलाओं के लिए समान वेतन और समान अवसर का प्रावधान भी जोड़ा गया है। अब अलग-अलग शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को भी बराबरी के अधिकार दिए जाएंगे। इसके अलावा नौकरी छूटने की स्थिति में कर्मचारियों को दोबारा ट्रेनिंग देने के लिए नेशनल रीस्किलिंग फंड बनाया जाएगा। इससे बेरोजगार हुए कर्मचारियों को नए कौशल सीखने और दूसरी नौकरी पाने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव श्रमिकों की सुरक्षा और देश की अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूत करेंगे।
कामकाज की तस्वीर बदलेगी
सरकार इन नए लेबर कोड को भारत की श्रम व्यवस्था में बड़ा सुधार मान रही है। एक तरफ कर्मचारियों को ज्यादा सुरक्षा, पारदर्शिता और सुविधाएं मिलने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कंपनियों के लिए नियमों को सरल बनाया गया है। आने वाले समय में इन नियमों का असर देश के करोड़ों कर्मचारियों और उद्योगों पर दिखाई देगा। फिलहाल नए लेबर कोड को लेकर कर्मचारियों और कंपनियों दोनों की नजर इसके लागू होने के बाद होने वाले बदलावों पर टिकी हुई है।