देश में एलपीजी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और गैस सप्लाई में आई कमी के कारण सरकारी तेल कंपनियों ने नए गैस कनेक्शन जारी करना फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला करीब एक महीने से लागू है और अभी तक इसे दोबारा शुरू करने को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। कंपनियों का कहना है कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ी प्राथमिकता पुराने ग्राहकों को बिना रुकावट गैस सप्लाई देना है।
भारत की आयात पर निर्भरता बनी बड़ी वजह
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। हर साल देश में करीब 3.3 करोड़ टन गैस की खपत होती है, जिसमें लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा आयात से आता है। इसका ज्यादातर सप्लाई पश्चिम एशिया से होता है। ऐसे में वहां के हालात बिगड़ने का सीधा असर भारत की सप्लाई चेन पर पड़ता है। हालिया तनाव ने इस निर्भरता को और उजागर कर दिया है।
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होर्मुज तनाव से प्रभावित हुआ रास्ता
पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी पड़ा है, जो दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां से गुजरने वाले जहाजों पर असर पड़ा है, जिससे गैस और तेल की सप्लाई बाधित हो रही है। इस वजह से कंपनियों को अपने संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना पड़ रहा है और नए कनेक्शन फिलहाल रोक दिए गए हैं।
नए ग्राहकों को करना होगा इंतजार
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो नया गैस कनेक्शन लेने की योजना बना रहे थे। नए घर में शिफ्ट होने वाले लोग या ग्रामीण इलाकों में पहली बार एलपीजी कनेक्शन लेने वाले परिवारों को अब कुछ समय तक इंतजार करना होगा। हालांकि जिन लोगों के पास पहले से कनेक्शन है, उन्हें फिलहाल सप्लाई में कोई बड़ी परेशानी नहीं होने दी जा रही है।
सरकार की नजर हालात पर बनी हुई है
सरकार और तेल कंपनियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में देश की एलपीजी खपत 33.21 मिलियन टन रही है, लेकिन हालिया घटनाओं के कारण सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होंगे, नए कनेक्शन फिर से शुरू कर दिए जाएंगे। फिलहाल पूरा ध्यान इस बात पर है कि देश में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे और आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो।