New strategy away from India: दक्षिण एशिया में भू-राजनीति एक बार फिर करवट लेती दिखाई दे रही है। 2014 से ठप पड़े सार्क को लेकर अब बांग्लादेश और पाकिस्तान एक नए क्षेत्रीय गठबंधन की तैयारी में जुटे हैं, जिसमें भारत की जगह चीन को शामिल करने की चर्चा है। बांग्लादेश के विदेश सलाहकार मोहम्मद तोहिद हुसैन के हालिया बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के लिए पाकिस्तान के साथ खड़ा होना संभव है, लेकिन नेपाल और भूटान जैसे देश भारत से अलग होकर ऐसा कदम नहीं उठा सकते। यह बयान तब सामने आया है जब पिछले साल बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद देश की विदेश नीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।
चीन–पाकिस्तान के साथ नई धुरी
जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक अहमद डार ने संकेत दिया था कि बांग्लादेश और चीन के साथ त्रिपक्षीय सहयोग शुरू करने पर काम हो रहा है। बांग्लादेशी सरकारी एजेंसी ने भी यही दावा दोहराया कि भविष्य में इस समूह में और देशों को जोड़ा जा सकता है। माना जा रहा है कि यह नया गठबंधन भारत को क्षेत्रीय प्रभाव से घेरने की एक रणनीति भी हो सकता है। अगस्त में डार की ढाका यात्रा और उसके बाद यूनुस तथा शहबाज शरीफ की मुलाकातों ने इन अटकलों को और मजबूत किया है।
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हसीना की विदाई और बदले तेवर
विशेषज्ञों का कहना है कि शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद बांग्लादेश की विदेश नीति में बड़ा मोड़ आया है। भारत की मदद से 1971 में बने बांग्लादेश में अब मोहम्मद यूनुस की सरकार चीन और पाकिस्तान के करीब आती दिख रही है। बांग्लादेश के नए रुख ने दक्षिण एशिया की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है, खासकर ऐसे समय में जब सार्क वर्षों से निष्क्रिय है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि यह प्रस्तावित नया ब्लॉक वाकई आकार लेता है या सिर्फ कूटनीतिक दबाव का हिस्सा है।