Terrorist Organizations: ऑपरेशन सिंदूर के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर घिर चुके पाकिस्तान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा घटनाक्रम में आतंकी संगठनों ने खुले मंच से भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान देकर एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन बयानों से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तानी सेना और आतंकी नेटवर्क के बीच गठजोड़ अब भी सक्रिय है।
खुले मंच से आतंकी बयान
पाकिस्तान के रहीम यार खान में आयोजित एक कार्यक्रम में जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने भारत विरोधी भाषण दिए। इस दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें पाकिस्तानी सेना का समर्थन प्राप्त है। इन दावों ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
जमात-उद-दावा के नेता अताउल्लाह घिलजई ने अपने संबोधन में कहा कि उनका संगठन भारत के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उसने दावा किया कि पाक सेना के साथ तालमेल के जरिए वे अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। इस तरह के बयान क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखे जा रहे हैं।
राजनीति में उतरने का ऐलान
लश्कर के कमांडर सैफुल्लाह कसूरी ने न सिर्फ कट्टरपंथी सोच का खुला समर्थन किया, बल्कि पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय होने की बात भी कही। उसने कहा कि मदरसों से प्रशिक्षित कट्टर लड़ाके ही समाज की जरूरत हैं और शरिया कानून को लागू करने के लिए यही रास्ता अपनाया जाएगा। यह बयान पाकिस्तान के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ाता है।
भारत के खिलाफ साजिश का संकेत
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ये बयान हालिया सैन्य घटनाओं के बाद पाकिस्तान के भीतर बढ़ते असंतोष को दबाने की कोशिश हैं। भारत विरोधी बयानबाजी के जरिए जनता का ध्यान भटकाने और आतंकी नेटवर्क को फिर से सक्रिय दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे साफ है कि क्षेत्र में तनाव बढ़ाने की साजिश अब भी जारी है।