निर्मला सीतारमण ने बढ़ती महंगाई और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत को तीन अहम क्षेत्रों पर फोकस करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में देश को “3F” यानी फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेक्स रिजर्व पर खास नजर रखनी होगी। वित्त मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल और गैस की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है।
ईंधन और उर्वरक की बढ़ती कीमतों पर चिंता
मुंबई में SIDBI के कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि फर्टिलाइजर की कीमतें “अकल्पनीय स्तर” तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतें सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर खेती, परिवहन और उद्योगों तक पहुंच रहा है।
पीएम मोदी की अपील का भी किया जिक्र
सीतारमण ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार बचाने को लेकर नरेंद्र मोदी की हालिया अपील बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में गैर-जरूरी आयात कम करना जरूरी हो जाता है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल बचाने और सोने की खरीद कम करने की अपील की थी।
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‘जियो-पॉलिटिक्स से आगे का संकट’
वित्त मंत्री ने कहा कि मध्य-पूर्व का तनाव केवल राजनीतिक संकट नहीं है। इसका असर आम लोगों की जिंदगी और कारोबार दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ईंधन महंगा होने, शिपिंग लागत बढ़ने, कार्गो में देरी और इनपुट कॉस्ट बढ़ने जैसी समस्याएं वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं।
अर्थव्यवस्था को लेकर दिया भरोसा
उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है। उनके मुताबिक जीएसटी कलेक्शन और निजी निवेश में सुधार यह दिखाता है कि देश की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि डर और नकारात्मक माहौल बनाने के बजाय लोगों में भरोसा पैदा करने की जरूरत है।
सरकार ने उठाया राजस्व नुकसान
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सरकार के रुख का बचाव करते हुए सीतारमण ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती के कारण केंद्र सरकार को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने MSME सेक्टर में भुगतान देरी की समस्या पर भी चिंता जताई और बैंकों से छोटे उद्योगों का बकाया समय पर चुकाने की अपील की।