Noida clean campaign: कभी स्वच्छता रैंकिंग में 327वें पायदान पर खड़ा नोएडा आज स्वच्छता के क्षेत्र में देश के लिए प्रेरणा बन चुका है. वर्ष 2018 में जहां कचरे की भरमार और अव्यवस्थित सफाई व्यवस्था शहर की पहचान थी, वहीं 2025 तक नोएडा ने मेहनत, तकनीक और जनसहभागिता के दम पर न केवल खुद को बदला, बल्कि ‘गोल्डन सिटी अवार्ड’ जीतकर इंदौर जैसी मिसाल पेश की.
नए सफर की शुरुआत: बदलाव की ठोस नींव
2019 से नोएडा प्रशासन ने सफाई व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार किए. डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, जागरूकता अभियानों और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी योजनाएं लागू की गईं. इस सकारात्मक पहल का असर दिखा और शहर ने 177 स्थानों की छलांग लगाकर 150वां स्थान पाया. यह केवल एक रैंक नहीं, बल्कि एक मजबूत इरादे की शुरुआत थी.
राज्य में शिखर पर: सफलता की कहानी
2020 में नोएडा ने उत्तर प्रदेश में पहला स्थान पाया और देश में 25वें नंबर पर पहुंच गया. इसके बाद 2021 और 2022 में यह सफलता बरकरार रही. शहर ने प्लास्टिक कचरे पर नियंत्रण, हरित क्षेत्रों के विस्तार और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बल पर देश में चौथा स्थान हासिल किया. इस निरंतरता ने नोएडा को स्वच्छता का रोल मॉडल बना दिया.
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गिरावट नहीं, नई उड़ान की तैयारी
2023 में भले ही राष्ट्रीय रैंक 11 से 14 हो गई, लेकिन यूपी में नोएडा शीर्ष पर बना रहा. प्रशासन ने इसे सुधार का अवसर माना और 2024-25 तक फिर से ‘गोल्डन सिटी’ बनकर देश का गौरव बढ़ाया. यह सफर बताता है कि जब प्रशासन, कर्मचारी और आम लोग साथ हों, तो कोई भी शहर स्वच्छता का नया इतिहास रच सकता है.
संदेश साफ है – स्वच्छता सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है. नोएडा की तरह हर शहर बदलाव ला सकता है, बस जरूरत है सामूहिक प्रयास और संकल्प की.